29 April 2004

आखिर हम अपना हाथ कितनी बार बढाऐंगे?

हमारे कविमन प्रधानमंत्री ने कल रहस्योदघाटन किया कि कारगिल युद्ध के दौरान बुश अंकल के फटकारने पर उन्होनें पाकिस्तान के हिस्से की जमीन वापस कर दी (यह शेखी मारना वे नहीं भूले कि हमने पहले अपने हिस्से की जमीन वापस ली|)! उनके श्रीमुख से "सारी दुनिया ने भारत के इस कदम की तारीफ करी|" Stunned! भाई मैं तो अवाक रह गया इस अदा पर|कुछ प्रश्न जो मेरे दिमाग को मथ रहे हैं, वे बिंदुवार पेश हैं‌‌‌‌‌

  • उनके हिस्से की जमीन वापस करी, तो क्या पाक अधिकृत कश्मीर तथाकथित रोडमैप के हिसाब से पाक पर न्यौछावर हो चुका है सिर्फ घोषणा बाकी है?

  • संभवतः १९७० युद्ध के बाद ईंदिरा जी द्वारा अपने कब्जे की जमीन लौटाये जाने कविराज अटल जी ने आपत्ति की थी, उन्ही के शब्दों में "स्वर्ण सिहं जी, आपके अनुसार हम जमीन लौटाकर उनकी ओर शांति का हाथ बढा रहे हैं, यही हाथ पिछले दो युद्धोपरांत भी हम बढा चुके हैं| आखिर हम अपना हाथ कितनी बार बढाऐंगे?" आज यही यक्ष प्रश्न आपके सामने हाजिर है, अटल जी आखिर हम अपना हाथ कितनी बार बढाऐंगे?

  • सारी दुनिया ने कब हमारी तारीफ की? या तो मैं बहरा हूँ या मैं अखबार नहीं पढता‌ कम से कम मैंने तो किसी को भारत की पीठ ठोंकते देखा नही कि भाई वाह क्या बात है, कितने अच्छे बच्चे हैं आप कि एक ही डाँट में मान गये|

  • सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न, कि अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण घोषणा करने की अपने यहाँ कोई नीति नही है क्या| किसी भी मंच से हमारे नेता मंत्री घोषणा,रहस्योदघाटन कर देते हैं और ताकि बाद में पत्रकारों पर बयान मरोड़ने की तोहमत लाद कर आलोचना से बचा जा सके| पत्रकार सम्मेलन या विभागीय स्थल तभी उपयोग किये जाते हैं जब मंत्री जी स्कूली बच्चे की तरह भली भाँति तैयार होते हैं, लिखे बयान व सूचनाओं के साथ|
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