01 April 2004

भारत उदय

सुबह से दोपहर शाम तक
बाल्टी और ब्रश लिए हुए
एक लंबी कतार दिखाई पड़ती है
आपके घर पर सफेदी पोतने के लिए
न मालुम कहाँ से आए हैं यह लोग
किस फैक्ट्री से निकले है यह लोग
और दिन भर सख्त मेहनत करने के बाद
अब यह सुस्ता रहे हैं
मेरा भारत चमक रहा है
मैने टीवी पर चाय का बगीचा देखा
और सैकड़ो कर्मचारी काम करते हुए
मनुष्य से ज्यादा भूत लग रहे थे
मैने एक सोती दुकान देखी
ग्राहकों से खाली
दुकानदार समझदार था
टूटी फूटी डिस्पेंसरी, बंद प्राइमरी स्कूल
और पीछे की दीवार पर पोस्टर था
इसमें मुस्कुराते हुए वोटर से कुछ कहा गया था
मैं देख सकता हूँ कि फील गुड लिखा है
इस बीच मेरा बिजली का बिल तीन गुना बड़ गया
है और मैं चुपचाप बड़बड़ा रहा हूँ
मेरा भारत चमक गया है|
- दैनिक जागरण पर खुशवंत सिंघ जी के कालम से साभार