01 April 2004

एक अखबार से कुछ कतरनें

शीर्षक है हिंदी पाकी भाई भाई
३० मार्च २००४, उड़ीसा
उड़ीसा के पाकिस्तानी हाई कमिश्नर कार्यालय के बाहर सूखाग्रस्त जिलों से हजारों नागरिक पाकिस्तानी वीजा के आवेदन हेतु मजमा लगाये हैं| ऐसे एक समूह के बुजुर्ग नेता ने पूछने पर बताया कि उसके गाँव कालाहाँडी में वर्षों से पानी नहीं बरसा और वहाँ कुछ खाने को नही है| यह पूछे जाने पर कि सूखे और क्रिकेट हेतु वीजा का क्या संबध है ग्रामीणों ने क्रिकेट के बारे में पूर्णतः अज्ञानी होना स्वीकार किया| उन्होनें संवाददाता को पाकिस्तानीयों द्वारा भारतीय क्रिकेट दर्शकों को मुफ्त भोजन एवं आवासीय सुविधा उपलब्ध कराये जाने के किस्सो के बारे में बताया| एक युवा ने कहा "हम ऐसे स्वर्ग के दर्शन जरूर करना चाहेगे| हम आम के छिलके खाने पर मजबूर हैं| हमें उम्मीद ही नही पूरा विश्वास है कि पाकिस्तानी भाई हम भारतीयों को मुफ्त कबाब जरूर खिलायेगे|"

२६ मार्च , लाहौर
मशहूर अनारकली मार्केट के रेस्टोरंट मालिक उन पाकिस्तानियों के समूह के बारे में शिकायत कर रहे हैं जो गाँधी टोपी व धोती का वेशधारण कर भारतीय होनें का नाटक करते हैं| एक होटल मालिक ने बताया " वे अलीगड़ एवं हैदराबाद की जिंदगी के बारे में जोर जोर से बात करके हमारा ध्यानाकर्षण करते हैं| कई प्लेट कवाब सफाचट करने के बाद उनकी लुभावनी बातों मे आकर होटल मालिक बिल माफ कर देते हैं| " होटलवालो ने इस धोखाधड़ी का भेद कुछ भारतीयों की मदद से खोला| भारतीयों ने बताया कि आजकल हिंदुस्तान में सिवाय नेताओं के गाँधी टोपी व धोती कोई नही पहनता| एक वेटर ने तो पुलिस को भी ईस बारे में आगाह किया था| लेकिन वे गलती से एक सिखो के समूह को मुफ्तखोर अफगानी समझ कर उठा ले गये|

२६ मार्च , पेशावर
मोटा राजन ने कहा "व्यापार, शांति की राह है|" श्री राजन मुंबई से पेशावर ऐसी व्यापारिक संभावनाए तलाशने आए हैं जो दोनो शहरो को एक सूत्र में पिरो सकें| पेशावर की एक मशहूर बंदूक की दुकान के आगे खड़े श्री राजन, उपलब्ध माल की गुणवत्ता से चकित थे| उन्होने कहा कि "मुंबई में हमें यूपी एवं बिहार की दोयम दर्जे की बंदूको पर गुजर करनी पड़ती है| यहाँ कि बंदूक कही बेहतर हैं| उन्होनें चमकती आँखो से आगे कहा "जरा सोचिए,एक बार ईन क्लाशिन्कोव राईफल एवं राकेट लाँचर मिलने पर हम अपने विरोधियों का क्या हश्र करेंगे|" श्री राजन पठानों के पारंपरिक सत्कार से आह्वलादित थे| अपनी जेब से हेरोईन का पैकेट दिखाते उन्होनें कहा "देखिए उन्होनें मुझे क्या तोहफा बख्शा है|" उनके विचार से पाकिस्तानी पुलिस का व्यवहार हिंदुस्तानी पुलिस से हजार दर्जे बेहतर है| पाकिस्तानी पुलिस उन्हें देख बारंबार मुस्कुराती है और हिंदुस्तानी पुलिस को पाकिस्तानी पुलिस से सीख लेनी चाहिए|

२८ मार्च , मुल्तान
पाकिस्तानी पुलिस, अलकायदा प्रमुख लादेन एवं जवाहिरी को पकड़ने के स्वर्णिम अवसर हाथ से निकल जाने से हताश है| एक पाकिस्तानी खुफिया अफसर ने बताया "हमने उन्हें वाना कस्बे में घेर लिया था| पर उन दोनो ने बेमिसाल तरकीब भिड़ाई| अपनी दाढी मूँछ मुढा कर व पारंपरिक अफगानी छोड़ भारतीय कपड़े पहन कर वे हमारे चंगुल से निकल गये|" शहर में छुट्टा घूमते अनगिनत भारतीय क्रिकेट दर्शकों के बीच किसी ने उन्हें नही पहचाना| वे मैच देखने जा रहे है ऐसा सोच कुछ भलेमानुष पाकिस्तानियों ने उन्हें लिफ्ट दे दी| खुफिया अफसर ने आगे कहा "मुल्तान में उन्हें मैच का फ्री टिकट भी मिला और उनहोनें पहले दिन का खेल देखा|" एक पाकिस्तानी दर्शक जो उनके बगल में बैठा था उसके अनुसार उनमे से एक तिरंगा लिए था व दूसरा प्राऊड टू बी ईंडियन लिखी शर्ट पहने था| उस दर्शक को तब दाल में काला लगा जब उन दोनो ने हर बार उसके बातचीत शुरू करने के प्रयास पर निगाहें फेर ली| दर्शक ने कहा "मैं समझा वे बजरंग दल से हैं|"

२८ मार्च , कराँची
एक कराँचीवासी भारतीय, पाकिस्तानियों द्वारा भारतीयों को दी जा रही शानदार मेहमानवाजी से कतई अप्रभावित है| इन सज्जन का कहना है "इसमें खास क्या है, वे बरसों से मेरा खास ख्याल रख रहे हैं|" यह पूछे जाने पर कि वे मुंबई छोड़ कराँची में क्यों बसे, उन्होने बताया कि वे वहाँ काफी अच्छी जिंदगी बसर कर रहे हैं, पाकिस्तानियों ने उन्हें न सिर्फ अच्छा घर दिया बल्कि सुरक्षाकर्मियों भी मुफ्त उपलब्ध कराये| ये भारतीय सज्जन जिनका शुभनाम दाऊद ईब्राहिम है मुबंई को तहेदिल से याद करते हैं| उनके अनुसार उन्हें मुंबई अपने लिए अभी भी व्यापारिक संभावनाओं से परिपूर्ण लगता है|

1 comment:

सुभाष चंदर said...

kuch vyangya achhe han.par har joke vyangya nahi ho sakta