18 August 2004

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थितः

नागपुर में एक बदनाम मवाली अक्कू यादव को दो सौ महिलायों के झुंड ने भरी अदालत से खींच कर यमलोक पहुँचा दिया| यह कृत्य कतई अराजक नहीं कहलाना चाहिए क्योंकि अक्कू यादव पर हत्या,बदचलनी और जबरन वसूली के दो दर्जन से अधिक मुकदमें होने के बावजूद वह छुट्टा साँड़ की तरह घूम रहा था| पिछली जनवरी में क्रुद्ध भीड़ द्वारा उसका घर जमींदोज कर दिये जाने के बाद उसने खुद को असुरक्षित जान कर आत्मसमर्पण कर दिया था| हमारी कानून व्यवस्था पर रोज लाखों करोड़ो भुक्तभोगी लानत भेजते है पर लगता है उस की गैंडा खाल पर ऐसी बर्छियों से ही असर होगा| जज साहब ने ईस घटना में बंदी पाँच महिलाओं को सामाजिक संस्थाओं के पुरजोर विरोध एवं दो सौ महिलाओं द्वारा आरोप सामूहिक रूप से अपने सिर पर लेने पर अड़ जाने के बाद ही जमानत दी| जज साहब को समझना होगा कानून जनता के लिए बना है , जनता कानून के लिए नही| लगता है नेताओं, पुलिस और शासकों की कारगुजारियों का घड़ा अब धीरे धीरे भर रहा है| करोड़ो लोगो का शांत गुस्सा जब लावा बन कर फूटेगा तो पापी नेताओं, पुलिस और शासकों की सरेआम जूतमपैजार होनी तय है|

व्यवस्था ईस हद तक सड़ चुकी है कि घरेलू औरतें कानून अपने हाथ लेने को मजबूर हो गई| ईस देवीशक्ति रूप को शतः शतः नमनः|

इस समाचार के साथ एक और पुलिसिया काहिली का मुद्दा उठाता हूँ| मेरे शहर कानपुर और उसके आसपास पिछले दोतीन साल से अपहरण उद्योग पनप रहा है| बीहड़ के डाकू अब मोबाईल से लैस होकर माडर्न बन गये है| शहर के धनाड्यों को छुटभैये अपराधी अगवा करके बीहड़ में ले जाकर डाकूओं को बेच देते हैं| डाकू बिचौलिओं की मदद से फिरौती वसूल कर अपहृत को पुलिस के हवाले कर देते हैं| पुलिस अगले दिन अखबारों में मूँछो पर ताव देती हुई फर्जी मुठभेड़ के किस्सों के बीच (जिसमें कभी कोई डाकू न मरता है न पकड़ा जाता है) मुक्त अपहृत के साथ फोटोसेशन करवाती है| कई बार किसी राजनेता , वीआईपी या पुलिसिया रिश्तेदार के चंगुल में फंस जाने पर ही पुलिस बड़ी वीरता के साथ डाकुओं के ही किसी रिश्तेदार को पकड़ कर मोलभाव करती है| आमजनता के लिए पुलिस की सलाह है कि जेब ढ़ीली करो और अपना रिश्तेदार छुड़ाओं| पुलिस के पास ट्रको और राहगीरो से वसूली जैसे और भी महत्वपूर्ण काम है अतः वह किसी मजलूम को डकैतों से रिहाई जैसे टुच्चे काम में समय क्यो जाया करे|

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