10 November 2004

भारत यात्रा ‍२००४













वर्ष २००४ का ग्रीष्मावकाश भारत में बीता| पूरे चार वर्ष बाद जाने का सुअवसर मिला| चार साल में गंगा में काफी पानी बह चुका है| अपने शहर कानपुर के अलावा लखनऊ और कुल्लू मनाली देखने का मौका मिला| कानपुर और लखनऊ दोनों की शक्लोसूरत कल्पना से ज्यादा बदल चुकी है|
कानपुरः औद्योगिक परिवेश जिस तरह से रसातल में जा रहा है , हर मध्यमवर्गीय छोटा मोटा कामधंधा करके बेरोजगारी से जूझने को विवश है| आमदनी सीमित है पर डीवीडी , वाशिंगमशीन और नाना प्रकार की वस्तुऐं सबको चाहिए| मेरी एक चाचीजी के शब्दों में "सब निन्यानबे के फेर में पड़े हैं, कोल्हू के बैल की तरह"| छोटे छोटे रेस्टोरेंट भी पैकेजिंग पर ज्यादा जोर देने लगे हैं| सड़के छोटी होती जा रही हैं पर कारें बेहिसाब बड़ रही है| बच्चें तक पावर पफ गर्ल्स , जान कैरी और हारले डेविडसन से वाकिफ हैं| हलाँकि दैनिक बिजली कटौती से अँधेरे पड़े साईबर कैफे मुझे जतला रहे थे कि छह साल पहले उत्तर प्रदेश छोड़ कर मैने कोई गलती नहीं की|
लखनऊः इस शहर को प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र और राजधानी होने का फायदा मिला है| जगह जगह मैकडोनाल्ड और पिजा की दुकानें उग आई हैं| फ्लाईओवर और नई सड़के बन जाने से यातायात सुगम हो गया है| उपनगर योजनाबद्ध तरीके से बस रहे हैं| पर सहारा सिटी जैसे चारदीवारी से घिरे क्षेत्र पूरे शहर की बीच अमीरों के लिए बने टापू जैसे लगते हैं| यह दीवारे आगे चलकर वर्गसंर्घष का कारण बनेंगे,इसके आसार तो अभी से दिखने लगे हैं| युवाओं के बीच बढ्ते अपराध,अपहरण उघोग पैसे को किसी भी तरह से हासिल करके सहारा सिटी में बसने का टिकट पाने की जद्दोजहद नहीं तो और क्या है? पुराना लखनऊ अब भी नवाबियत समेटे है| पर जीर्ण शीर्ण होते ऐतिहासिक स्मारक देख कर समझ नहीं आता कि पुरात्तव विभाग की तोंद कितनी बड़ी और कुंभकर्णी नींद कितनी गहरी है|
कुल्लू-मनालीः आधुनिकता तो यहाँ भी पैर पसार रही है पर प्राकृतिक सुंदरता ने दिल चुरा लिया| सवेरे पहाड़ो से झाँकते बदल, सैकड़ो प्रचीन मंदिर, पीठ पर सेबों की टोकरी लादे पहाड़ी किसान और तेज आवाज के साथ बहती व्यास नदी , मेरे दिमाग पर अमिट छाप छोड़ चुके हैं| हमारी चारूजी ने यह प्राकृतिक सुंदरता देख कर जो कुछ फरमाया उसका सार यह है कि "काश अमेरिका की कार, अमेरिका वाला स्कूल (भारत में होमवर्क बहुत मिलता है), अमेरिका के सारे खिलौने , पीजा वगैरह और पापा की जाब (डालर भी जरूरी हैं) यदि कुल्लु-मनाली में एक साथ मिल जाये तो मजा आ जाये|"


5 comments:

Jitendra Chaudhary said...

अतुल भाई,
मजा आ गया... कानपुर की यादें ताजा हो गयी.

एक निवेदन है, अपने फोटो ब्लाग्स का अंग्रेजी अनुवाद भी करे...मेरे कुछ अहिन्दी भाषी, पाकिस्तानी दोस्तो का निवेदन है ये. अब आपका ब्लाग पाकिस्तान मे भी मशहूर होने लगा है.

दूसरा, एक तकनीकी सुझाव है,आप फ्लिकर का स्लाइडशो फीचर क्यो नही इस्तेमाल करते? इससे आपके यूसर्स को नेक्सट पर क्लिक नही करना पड़ेगा, और वो स्लाइडशो की स्पीड भी घटा बढा सकते है.

आपकी देखा देखी मेरे को भी फोटोग्राफी का भूत सवार हो रहा है, डिजिटल कैमरा सिलेक्ट मे कुछ तकनीकी सहायता करें.

Atul Arora said...

Jitu Bhai

Tareef ke liye shukriya. Bahi aapka comment bakayda dikh raha hai blogger per.

Let us talk about your comments one by one. First of all, thanks again for the links, but bahi ji I have created flash show for some security reason. it is not easy (though not impossible) to capture the photos from a flash show. I have created this flash component myself.
Now I just copy one image folder on server and create one XML file to define the images and their captions. For some reason Flash is not displaying Devnagri correctly (though it can show unicode correctly).
It is good to know that your pakistani friends also like the show, I was wondering to see some IP addresses originating from pakistan at blogpatrol (now I know why). But this will require me to maintain two blogs for same content. Jitu bahi time mila to yeh bhi karoonga.

As far as camera is concerned, my wife thinks that she is better photographer and I only know how to click the camera. My camera is only 1.2Megapixel (free mein mila hai Credit card ke score points se, jinse meri bibi bartan kahridne wali thi).
A friend of mine has once suggested that Lenses of minolta and Olympus are better than others. Anything beyond 3 megapixel is sufficient. Look for good optical zoom. Unless you planning to enlarge your snaps don't spend too much money on 4/5 Megapixel cameras. Here good quality cameras may be found in $125/$150. Pankaj Narula (of Hann Bahi) may also have good suggestions.

Prashant Tewari said...

Dear Atul,

Great writing. Remember me ??

Atul Arora said...

प्रशांत भाई
आपने अपनी इमेल नही छोड़ी| इसलिए यही पर जवाब देना पड़ रहा है| प्रशांत तिवारी से मुझे अपने एक ही मित्र की याद है जो जवाहर नगर मे मेरे साथ कक्षा तीन मे पड़ता था फिर सीएमसी में मिला| आप वही तो नही हैं?अगर आप यह पड़े तो कृपया अपनी इमेल जरूर बता दीजिऐगा|

रेलगाड़ी said...

आज सुबह से ही चिट्ठे पढ़्ने में मगन हूं! लखनऊ के बारे में पढ़्कर और चित्र देखकर अच्छा लगा।