07 December 2004

चोला बदल कर पहचान छुपाने का अचूक मंत्र



शेर के लिए लोमड़ी की खाल पेश है!


११ सितंबर २००१ के बाद दुनिया काफी बदल गयी है अमेरिकी नागरिकों के लिए| अमरीकी सरकार की सारी कारगुजारियों का दंश झेलना पड़ता है अमेरिकी नागरिकों को, खासतौर से पयर्टकों को| एक तो खड़ूसपने की हद तक किए गये सुरक्षा ईंतजाम उसपर से ईराक में हुई कारगुजारियाँ| यूरोप में अक्सर अमेरिकी प्रतीक चिन्हों वाले कपड़े धारण किये यह पयर्टक किसी न किसी अनचाही राजनीतिक बहस में घसीट लिए जाते हैं| उनपर फिकरेबाजी होना, होटल या बार में प्रवेश न मिलना भी आम बात हो गई है| लेकिन अब अमेरिकी नागरिकों को अब यूरोप भ्रमण के दौरान जलालत झेलने से बचने का अचूक नुस्खा मिल गया है| भला हो एक कंपनी का जिसने go canadian पैकेज ईजाद कर दिया है| अब अमेरिकी नागरिक कैनेडियन प्रतीक चिन्हों वाले कपड़े धारण कर शान से यूरोप विचरण कर सकते हैं| ईस पैकेज में टीशर्ट, टूरिस्ट बैग पर लगाने के लिए प्रतीक चिन्ह और कैनेडियन स्टाईल वाली ईंगलिश बोलना सिखाने How to Speak Canadian, Eh की किताब है| जय हो उपभोक्तावाद की| वैसे मौके का फायदा उठा के अमेरिकीयों को भारत भ्रमण के लिए भी खींचा जा सकता है| जब हमें विदेशी कांग्रेस अध्यक्ष स्वीकार्य है तो अमरीकी पयर्टकों की विदेशी मुद्रा तो शिरोधार्य होनी चाहिए| कुछ बातों का ध्यान जरूर रखना पड़ेगा|
  • फील गुड का स्लोगन पयर्टन विभाग से उड़ाकर चुनाव प्रचार की सामग्री न बनायी जाये|

  • वैसे अमेरिकी हर किस्म का माँस खाते हैं पर छिपकली शायद ही पसंद करें|

  • लखनऊ के कठमुल्लों को कोई जाकर समझा दे कि परायी आग में यह लोग हमेशा अपना घर जलाने क्यों दौड़ पड़ते हैं?
  • 1 comment:

    आलोक said...

    और उन्हें कुत्ते खाने वाले चीनी कोरियनों से भी तो आपत्ति थी।