28 December 2004

लालू प्रसाद यादव...


Akshargram Anugunj



फिल्म ताल के एक दृश्य में, मीता वशिष्ठ जो आलोक नाथ की बहन बनी है कहती हैं "भाई साहब, विक्की भले ही शातिर दिमाग हो पर दिल से बिल्कुल देहाती है|" दरअसल आलोक नाथ को विक्की में ईक्कसवीं सदी के शातिर भारतीय युवक के सारे लक्षण मौजूद होने के कारण उन्हें विक्की अपनी बेटी से शादी के लिए पसंद नहीं है, पर मीता वशिष्ठ के अकाट्य तर्क से वह हथियार डाल देते हैं| यही इस आलेख का सूत्रवाक्य है| हम भारतीय चाहे दिल से कितने भी आधुनिक क्यों न हों, सादगीपूर्ण व्यक्तित्व ही पसंद करते हैं| जब कस्बे और गाँवों में रहने वाला समाज अपने नेतृत्व को हाथ में सेलफोन , बगल में लैपटाप दबाये फीलगुड, पोटा ईत्यादि चीखते हुए देखता है तो उसे अपने से कटा हुआ महसूस करता है| उसकी समस्याऐं पचास साल में भी बदली नहीं है वही रोटी, वही पानी वही सड़क और वही समाज के उच्च वर्ग द्वारा शोषण| लालू प्रसाद रोटी सड़क दें या न दें, शोषण के खिलाफ मजलूमों को आवाज जरूर दे देंते हैं और यही उनकी सफलता के कारणों में एक है| सामान्य जनता का मन अभी भी अपने नेता में राजा हरीशचंद्र की छवि ढूढता है जो वेष बदल कर राज्य का पुरसाहाल लेता था|




यही ईमेज चलती है जनता के बीच!

जाहिर है एक ओर अगर रेलों में ईंटरनेट जैसी विशुद्ध अमेरिकी सुविधाऐं देने की बात करने वाले नेता हो दूसरी ओर रेलवे स्टेशन पर छापे मारने के सस्ते परंतु लोकप्रिय लालूवादी तरीके, तो भले ही दोनों जनता का धन लूटने के मामलें में एक ही थैली के चट्टे बट्टे हों, जनता जुड़ाव तो राजा हरीशचंद्र से ही करेगी बिल गेट्स से नही| चाहे लालू हों या मायावती दोनो समाज के शोषित वर्ग को समाज के उच्च वर्ग के खिलाफ खड़ा होने का हौसला देते हैं और इसीलिए उनके सर्वेसर्वा बने बैठे हैं| उदाहरण साफ है, जब मोहल्ले के पंडित और ठाकुर त्रिशूल यात्रा निकालते हैं तो कभी दलित वर्ग उनके साथ खड़ा होता है, नहीं| क्योकि उन्हे समझा दिया गया है कि रामजन्मभूमि के मलबे में कोई ऊँची जातवाला दबके नहीं मरा, वह सब तो बस नीचे खड़े नारे लगाते रहे| इसीलिए यह वर्ग महारैला में सवर्णों को लाठी चमका कर ही खुश हो लेता है, फिर चाहे पाँच साल भ्रष्टाचार में पिसता रहे| लालूश्री देहाती ही बने रहना चाहते हैं और वैसे ही दिखना चाहते हैं जैसा कि उनका वोटरवर्ग है| अगर उन्होनें हेयरस्टाईल या बोलने का लहजा बदला तो जनता कोई और लालू ढूढ लेगी| अभिजात्य वर्ग, जो राल्फ लारेन पहनना और वर्सेज लगाना सीख चुका है, अब देहाती भारतीयों को लाफिंग मैटर समझता है, इसीलिए उसे लालू भी विदूषक लगते हैं| अब जरा विषय को हल्के अँदाज की ओर मोड़ते हुए एक सच्ची परंतु मनोरंजक घटना का जिक्र करता हूँ| कुछ साल पहले जब शरद यादव केंद्रीय मंत्री थे ‌और लालू विपक्ष में, तब लालू जी ने "यह आईटी वाईटी क्या होता है?" कह कर एक नयी बहस को जन्म दे दिया| दिल्ली के प्रगतिमैदान में आईटी मेला लगा था और एक दिन लालू अपने चेले चपाटों के साथ मेले में पहुँच गये | आयोजकों को किसी हंगामें का डर सताने लगा| पर लालू चहलकदमी करते हुए वेबदुनिया के स्टाल पहुँच गये| हिंदी में चलती वेबदुनिया की साईट से उन्हे कौतूहूल हुआ| वेबदुनिया के संचालक जोश में आकर लालू जी के प्रश्नों का उत्तर देने लगे| किसी ने उन्हे बहुभाषी ईमेल सुविधा के बारे में बताया| लालूजी को यह जानकर निराशा हुई कि भोजपुरी वेबदुनिया की सूची में शामिल नहीं थी| पर उन्होनें एक ईमेल एकाउँट खोला और देवनागरी का प्रयोग करके पटना के किसी प्रशासनिक अधिकारी को भोजपुरी में ईमेल भेज मारी| पंडाल के बाहर संवाददाताओं के सवालो की बौछार का उन्होनें अपनी चिरपरिचित शैली में जवाब दिया "देखिए, हम आईटी का इसलिए विरोध करता हूँ क्योकि ई सब कंपूटर अंग्रेजी में चलता है| इससे गरीब गुरबा का क्या भला होगा? पर ई वेबदुनिया वाले अच्छा काम किये हैं, अभी हिंदी में कंपूटर चालू हैं, वादा किये हैं कि भोजपुरी भी लायेंगे कंपूटर पर| हम इस चीज से बहुत खुश हूँ|" खैर अगले दिन लालूजी की फोटो छपी पेपरों में ईमेल करते हुए और आईटी के पुरोधाओं ने चैन की साँस ली|




कंपूटर चालू हैं
पर उसी दिन माननीय केंद्रीय मंत्री शरद यादव प्रगतिमैदान पहुँचे| विभिन्न कंपनियों के स्टालो का अवलिकन करने के दौरान उन्हें कोई वेबदुनिया के स्टाल खींच ले गया यह कह कर कि कल लालू वहाँ गये थे और रंग जमा गये अपना| शरद यादव भी फोटो खिंचाते रहे | तभी किसी चमचे ने कहा "मंत्री जी, कल लालूजी ने ईमेल करी थी, आप भी करिए|" शरद जी ताव में कंप्यूटर कंप्यूटर के सामने बैठ गये और तामील किया वेबदुनिया के संचालक को कि "हमें भी ईमेल करनी है|" संचालक ने कहा "मंत्रीजी, पहले आप एकाउँट खोलिए|" यह सुनते ही शरद जी किंकर्तव्यविमूढ हो गये और उन्होने अपने सचिव को तलब किया| उन्होंने बड़े भोलेपन से सचिव से कहा , "भाई, यह कह रहे हैं कि ईमेल करने के लिए एकाउँट खोलना जरूरी है| पर मेरे पास इस वक्त कैश नहीं है, अब ईमेल कैसे करूँ?"

1 comment:

MANOJ said...

BADA MARMIK VAKYA LIKH GAYE HO BHAIYA- "ES ADAMI NE GARIBON KO BADA HAUSALA DIA".

SACHMUCH EK YAESE SAMAY MEIN JAB CHATUR-SUJAN NETAON KE LIYE GAUN KE GARIB-GURABE KAA VAJUD USAKE PET KE ALAAWA KUCHH NAHIN HAI,ES AADAMI NE BATA DIA KI GARIBON KO V UNAKI BANI "BIJALI SADAK PANI" SE ADHIK PRIYE HAI.US BANI KE SAATH 'SADAK-PANI' KAA SAUDA NAHIN HO SAKATA.
AB JABAKI 3/4 DIN MEIN BIHAR KAA CHUNAV PARINAM AANE WAALA HAI AUR SAMBHAV HAI KI YAH AADAMI SATTA SE VANCHIT HO JAYE MUJHAKO PATA NAHIN CHAL RAHA HAI KI KHUSH HONA CHAHIYE YAA UDAS.
MAINE HAMESHA ESAKE HAAR KI HI KAAMANA KI.PHIR V..
MAN MEIN BAAR_BAAR YAH KACHOTATA HAI KI JIS AADAMI KAA ANDAJE-BAYAN ETANA MAJUN HAI , USAME THODA SUBSTANCE V KYON NAHI HAI.
JNU STUDENT UNION KE EX-PRESIDENT CHANDRASEKHAR AUR NGO ACTIVISTS SARITA AUR MAHESH KE HTYAA KI YAAD AATI HAI.

MAN YAH DEKH KAR PRASHNN HOTA HAI KI EK LALU YADAV HAI.

MAN DUKHI HO JATA HAI KI 15 SAAL SE YAH AADAMI EK HI JAGAH DANDA LIYE KYON KHARA HAI.GANDHI NE TO LAATHI TEKATE HUYE VAMAN KI TARAH PURI DUNIA NAAP LI THI.

MAN YAH DEKH KAR SANTOSH KARANA CHAHATA HAI KI AGAR EK AADAMI DANDA LEKAR KHARA HO JAYE TO DANGAIYON KI KHAIR NAHI.

MAN YAH YAAD KARKE BHARI HO JATA HAI KI AAKHIR ISI DANDE KI CHHATRACHHAYA MEIN KAISE SARITA,MAHESH AUR CHANDRASEKHAR JAISE SAMRPIT LOGON KI HTYAA HOO JATI HAI.

CHANDRASEKHAR JAB JNU SE SIWAAN KI OR CHALAA THAA TAB MITRON NE KAVI RAGUBIR SAHAY KE PATRA RAMDAS KI TARAH KAH DIA THAA USAKI HTYAA HOGI. HATYAA HUI.

LATHI HAI,GARIB-GURABE KI VANI V HAI, BAS EK HI CHEEJ NAHIN HAI- VAH HAI JANPAKSHHIYE RAJANITI KAA VIVEK.

BAHARHAAL JO HAI USAKOO TO SALAAM KAREN AUR MAANEN KI "ES AADAMI NE GARIB-GURABOON KOO BADA HAUSALA DIYA."

SO BIHAR CHUNAV KE AANT MEIN JAB YAH AADAMI(KAUN JANATA HAI?) HAAR KE KAGAR PAR HAI EK BAAR USAKE DANDE KO SALAAM KAR LEIN.