24 November 2004

बाँके बिहारी का अनोखा कारनामा



यही दृश्य बना बवाल की जड़!


गत शनिवार को तीन चार परिवार पोलर एक्प्रेस फिल्म देखने पहुँचे| कुल ६ व्यस्क और ६ बच्चे| एक पूरी लाईन घेर कर सब बैठ गये और पिक्चर का आनँद लेने लगे| बाँके बिहारी यानि कि मेरे तीन साल ६ माह के पुत्ररत्न का यह सिनेमाहाल का पहला पहला अनुभव था| भाईजान अपनी बहन और बहन की सहेलियों के साथ बीच में बैठे एकटक पिक्चर देख रहे थे| बाँकेजी को कुल मिलाकर पिक्चर अच्छी लगी और मुझे संतोष था कि मुझे उसको गोद में बैठा कर कमेंट्री नहीं करनी पड़ रही | मुझे कानपुर के हीरपैलेस की याद है जहाँ एक दंपत्ति अपने नवजात शिशु के साथ पिक्चर देख रहे थे और बीच पिक्चर में बच्चा यकायक बुक्का फाड़ के रोने लगा| माँ ने बाप को कोंचा कि हफ्ते भर मैं बच्चा सम्भालती हूँ ईसलिए अभी तुम इसे बाहर ले जाकर चुप कराओ, बाप माधुरी दीक्षित का दिल धक धक करने लगा छोड़ कर नही जाना चाहता था| उधर बच्चे का क्रंदन बदस्तूर जारी था| उस दंपत्ति के अड़ियल रूख से आजिज आकर पीछे से कोई मनचला चिल्लाया "बच्चे के मुँह में निप्पल दे" | बाप तैश में पीछे मुड़कर "चीखा कौन है बे?" अँधेरे में आवाज आई "एक निप्पल इसके मुँह में भी दे"| खैर यहाँ अमेरिका में ऐसा कुछ न हो इसलिए हमने तीन साल से हाल में पिक्चर देखने की जहमत नही उठाई| पहला अनुभव अब तक सही जा रहा था कि अचानक बाँके बिहारी सिसकियाँ लेकर रोने लगे| मेरी मेमसाहब ने मुझे घुड़का इसे बाहर ले जाओ| बाहर लाने पर बाँके बिहारी फिर से अँदर हाल में जाने को लेकर पसड़ गये| मेरी आँखो में कानपुर का दृश्य तैर रहा था| मेरे लिए पहेली अबूझ थी कि आखिर छुटकऊ चाहते क्या हैं? बाहर रहना नही चाहते , अँदर जाते ही फूट फूट कर रोने लगते हैं| परेशानी की वजह अगर तेज आवाज वाले विराट दृश्य होते तो वह तो कबके निकल चुके| पर्दे पर जो दृश्य चल रहा था उसमें कुछ बच्चे उपहारों की भीमकाय थैली में जा गिरते हैं , जैसा कि चित्र में दिखाया है, फिर सेंटा क्लाज से मिलते हैं| मैनें चाहा कि बाँके बिहारी मेरी तरफ मुँह करके बैठै रहे , शायद सेंटा क्लाज से डर रहे हो| तभी मेरी मेमसाहब को माजरा समझ में आ गया और उन्होनें मुझे बताया कि जबसे स्क्रीन पर उपहारों के डिब्बे दिखने शुरू हुए हैं , बाँके बिहारी का मूड उखड़ गया है|बाँके बिहारी को सारी तकलीफ यही थी कि सेंटा क्लाज ने सारे बच्चों को तो गिफ्ट बाँट दिये पर बाँके बिहारी को क्यों छाँट दिया ? मैनें बाँके बिहारी से स्वर में यथासंभव नरमी लाते हुए पूछा "भईये, क्या गिफ्ट लेना है"? भईये की गर्दन तुरंत रजामँदी में नब्बे डिग्री के कोण पर हिली | बाकि कि पिक्चर उन्होनें पिक्चर से निकलते ही ट्वायसआरअस जाने के आश्वासन पर देखी | आगे क्या हुआ कहने की जरूरत नहीं क्योकि समझदार को ईशारा काफी है|

17 November 2004

क्या है भारतीय संस्कृति?


Akshargram Anugunj



ईस विषय पर सारे के सारे लिक्खाड़ एक से बड़ कर एक लेख लिखने में लगे हैं या लिख चुके होंगे| मैं ज्यादा गंभीर लिखने से बचकर कुछ शार्टकट लगाने की कोशिश करता हूँ| जो कुछ कहना है चित्रों को बोलने देता हूँ|




यह भारतीय संस्कृति की छोटी सी झलक है|





यह सब भारतीय संस्कृति पर लगे बदनुमा दाग हैं|



16 November 2004

स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ भ्रांतियाँ और स्पष्टीकरण




खाओ, पियो और ऐश करो प्यारे!

आजकल हर शख्स स्वास्थ्य और अपनी काया के आकार को लेकर चिंतित है| कोई ट्रेडमिल पर अपना तेल निकाल रहा है तो किसी ने अच्छा खासा खानापीना छोड़ कर हरे पत्ते यानि कि सलाद पर मुँह मारना शुरू कर दिया है| जिम, व्यायामशाला और तरूणतालों के दिन बहुर आयें हैं| बाडी फैट, फैट बर्निंग, कोलेस्ट्राल, लोकैलोरी-डाईट, कार्डियोवस्कुलर एक्सरसाईज जैसे शब्द अब ड्राईंग रूम की बहस पर हावी हो गये हैं| बहुत से आरामतलब लोग इस आपाधापी में हैरान हैं कि आखिर वजन घटाओ अभियान कितना जरूरी है| अतः जनसामान्य के लाभ के लिए डा. झटका से इस विषय में किया गया एक ज्ञानवर्धक वार्तालाप प्रस्तुत है|
प्रश्न १: डा. साहब, यह कहाँ तक सत्य है कि कार्डियोवस्कुलर एक्सरसाईज लंबे जीवन के लिए जरूरी हैं|
डा. झटका: दिल को रोज कुछ देर के लिए तेज धड़काने से भला आप ज्यादा दिन कैसे जी जायेंगे? हर चीज देरसवेर घिसती ही है| यह तो वही बात हुई कि तेज चलाने से आपकी कार के ईंजन की लाईफ बढ जायेगी| ज्यादा दिन जिंदा रहना है तो दिल की धड़कनों को फालतू खर्च मत करिए और चैन की नींद सोईये|
प्रश्न २: क्या माँसाहार खाना कम करके फल सब्जियाँ ज्यादा खाना फायदेमंद है?
डा. झटका: एक तीर से दो शिकार करना सीखिए| गाय,भैंस बकरे क्या खाते हैं - हरा चारा, हरी पत्तियाँ जो कि आखिरकार सब्जियाँ ही हैं| मुर्गा अनाज के दाने खाता है|इसलिए गोश्त और चिकन खाने से दोहरा फायदा होगा, माँस तो आप खायेंगे ही, जानवरो की खायी सब्जियाँ,अनाज और वनस्पति भी आपको फायदा पहुँचायेगी|
प्रश्न ३: क्या शराब कम पीना स्वास्थ्य के लिए अच्छा है?
डा. झटका: बिल्कुल नही| वाईन फलों से बनती है| ब्रांडी तो वाईन का परिष्कृत स्वरूप है| बियर अनाज के दानों से बनती है| वास्तव में यह सारी चीजें फलों से फालतू पानी निकाल कर बनाया गया परिष्कृत दृव्य है| इन सबको छोड़ना फलों से मुँह मोड़ने के बराबर है|
प्रश्न ४: नियमित व्यायाम के क्या फायदे हैं?
डा. झटका: शरीर में नियमित दर्द के अलावा कुछ नहीं हासिल होता |
प्रश्न ५: क्या उठक बैठक (sit-ups) लगाने से कमर की चर्बी कम हो जाती है?
डा. झटका: कतई नही| माँस पेशियों का आकार व्यायाम से हमेशा बढता ही है, आपको ज्यादा बड़ा पेट विकसित करना है तो शौक से उठक बैठक (sit-ups) लगाईये|
प्रश्न ६: तैराकी से क्या शरीर सुगठित हो जाता है?
डा. झटका: अगर ऐसा है तो व्हेल मछलियों जो जिंदगी भर तैरती रहती हैं, उनके बेडौल शरीर के बारे में क्या ख्याल है आपका?
प्रश्न ७: चाकलेट क्या स्वास्थ्य के लिए बुरी है?
डा. झटका: अजी चाकलेट कोको-बीन्स से बनी है, इससे बेहतरीन खाद्य पदार्थ हो ही नही सकता|
प्रश्न ८: क्या फास्ट फूड जो कि तेल में फ्राई होते हैं जैसे कि चिप्स,फ्रेंच फ्राई वगैरह स्वास्थ्य के लिए बुरे हैं?
डा. झटका: आप ध्यान नही दे रहे| यह सब खाद्य पदार्थ वेजीटेबल आयल यानि कि सब्जियों से बने तेल में पकते हैं| ज्यादा सब्जियाँ खाना नुकसानदायक कैसे हो सकता है|

उम्मीद है कि ईस साक्षात्कार ने आपके भोजन और आहार के विषय में बहुत से भ्रम दूर कर दिये होंगे| याद रखिए कि जिंदगी जिंदादिली का नाम है, मुर्दे भी क्या खाक जिया करते हैं|

10 November 2004

भारत यात्रा ‍२००४













वर्ष २००४ का ग्रीष्मावकाश भारत में बीता| पूरे चार वर्ष बाद जाने का सुअवसर मिला| चार साल में गंगा में काफी पानी बह चुका है| अपने शहर कानपुर के अलावा लखनऊ और कुल्लू मनाली देखने का मौका मिला| कानपुर और लखनऊ दोनों की शक्लोसूरत कल्पना से ज्यादा बदल चुकी है|
कानपुरः औद्योगिक परिवेश जिस तरह से रसातल में जा रहा है , हर मध्यमवर्गीय छोटा मोटा कामधंधा करके बेरोजगारी से जूझने को विवश है| आमदनी सीमित है पर डीवीडी , वाशिंगमशीन और नाना प्रकार की वस्तुऐं सबको चाहिए| मेरी एक चाचीजी के शब्दों में "सब निन्यानबे के फेर में पड़े हैं, कोल्हू के बैल की तरह"| छोटे छोटे रेस्टोरेंट भी पैकेजिंग पर ज्यादा जोर देने लगे हैं| सड़के छोटी होती जा रही हैं पर कारें बेहिसाब बड़ रही है| बच्चें तक पावर पफ गर्ल्स , जान कैरी और हारले डेविडसन से वाकिफ हैं| हलाँकि दैनिक बिजली कटौती से अँधेरे पड़े साईबर कैफे मुझे जतला रहे थे कि छह साल पहले उत्तर प्रदेश छोड़ कर मैने कोई गलती नहीं की|
लखनऊः इस शहर को प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र और राजधानी होने का फायदा मिला है| जगह जगह मैकडोनाल्ड और पिजा की दुकानें उग आई हैं| फ्लाईओवर और नई सड़के बन जाने से यातायात सुगम हो गया है| उपनगर योजनाबद्ध तरीके से बस रहे हैं| पर सहारा सिटी जैसे चारदीवारी से घिरे क्षेत्र पूरे शहर की बीच अमीरों के लिए बने टापू जैसे लगते हैं| यह दीवारे आगे चलकर वर्गसंर्घष का कारण बनेंगे,इसके आसार तो अभी से दिखने लगे हैं| युवाओं के बीच बढ्ते अपराध,अपहरण उघोग पैसे को किसी भी तरह से हासिल करके सहारा सिटी में बसने का टिकट पाने की जद्दोजहद नहीं तो और क्या है? पुराना लखनऊ अब भी नवाबियत समेटे है| पर जीर्ण शीर्ण होते ऐतिहासिक स्मारक देख कर समझ नहीं आता कि पुरात्तव विभाग की तोंद कितनी बड़ी और कुंभकर्णी नींद कितनी गहरी है|
कुल्लू-मनालीः आधुनिकता तो यहाँ भी पैर पसार रही है पर प्राकृतिक सुंदरता ने दिल चुरा लिया| सवेरे पहाड़ो से झाँकते बदल, सैकड़ो प्रचीन मंदिर, पीठ पर सेबों की टोकरी लादे पहाड़ी किसान और तेज आवाज के साथ बहती व्यास नदी , मेरे दिमाग पर अमिट छाप छोड़ चुके हैं| हमारी चारूजी ने यह प्राकृतिक सुंदरता देख कर जो कुछ फरमाया उसका सार यह है कि "काश अमेरिका की कार, अमेरिका वाला स्कूल (भारत में होमवर्क बहुत मिलता है), अमेरिका के सारे खिलौने , पीजा वगैरह और पापा की जाब (डालर भी जरूरी हैं) यदि कुल्लु-मनाली में एक साथ मिल जाये तो मजा आ जाये|"


09 November 2004

हाक माउन्टेन की विहंगम दृश्यावली













पेंसिलवेनिया राज्य प्राकृतिक रूप से काफी सुंदर और समृद्ध है| मई २००४ में हाक माउन्टेन जिसकी उँचाई ४०० फुट है और एशलैन्ड कोयले की खदान के दर्शन करने का अवसर मिला| हाक माउन्टेन पर पक्षी विज्ञानी बाज और कई अन्य पक्षियों का अध्ययन करने आते हैं| आप भी देखिए इस मनोरम वादी को|


03 November 2004

दो सबसे बड़े लोकतंत्रों की चुनावी चकल्लस

आखिरकार अमेरिका में चुनाव संपन्न हो गया|मुझे विश्व के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों (अमेरिका एवं भारत) में चुनाव के अदांज में कुछ अंतर दिखे| हम भारतीय ईनसे कुछ सीख ले सकते हैं| आप भी देखिए कुछ बुनियादी भिन्नताऐं हमारी चुनावी चकल्लस और अमरीकी इलेक्शन कैम्पेन में
१: अमेरिका में मतदान के दिन भी कोई अवकाश नहीं| कई लोग तड़के ही लाईन में लग कर मतदान करने गये और काम पर समय से हाजिर| या फिर शाम को लाईन में लगे| रात आठ बजे के बात समय सीमा समाप्त होने के बाद भी लोग लाईन में थे| प्रशासन भी व्यवहारिक है, आठ बजे के पहले आने वाले हर व्यक्ति को मतदान करने दिया गया चाहें रात के बारह क्यों न बज जायें| भारत में छुट्टी भी होती है, चुनाव आयोग का डंडा न हो तो सब चुनावी पार्टीयों की सवारी गाँठ कर ही वोट डालने जायेंगे, तब भी मतदान पचास प्रतिशत से हमेशा नीचे और चुनावी बहसें और मुद्दों पर चिंताए ड्राईगरूम और पान की दुकान से आगे नहीं बड़ पाती|
२: टीवी न्यूज में दिखाया कि दो महिलाऐं जो वर्षों से अच्छी मित्र हैं अलग अलग पार्टीयों को समर्थन दे रही हैं, और स्वस्थ बहस करते हुए साथ साथ काफी पी रही हैं| ऐसे दृश्य यहाँ अमेरिका में आम हैं| भारत में लोग चुनाव के बहाने व्यक्तिगत खुन्नस निकालने के फेर में ज्यादा रहते हैं| नतीजा हर बार पहले से ज्यादा चुनावी हिंसा|
३: अमेरिका में किस पार्टी ने कितना चुनावी चंदा ईकठ्ठा किया यह खुली किताब की तरह सबको पता होता है| बकायादा चुनावी चंदा ईकठ्ठा करने के लिए अभियान, पार्टियाँ और उत्सव होते हैं| जहाँ तक मेरी जानकारी है भारत में चुनावी चंदा का एकत्रीकरण काला धन सफेद करने का सबसे अच्छा जरिया है|
४: अमेरिका में उम्मीदवारों के बीच राष्ट्रीय स्तर पर टीवी पर बहस लोकतंत्र के स्वस्थ होने का परिचायक है| मुद्दो पर गंभीरता से बहस होती है और दोनो उम्मीदवार अच्छे स्कूली बच्चों की तरह बहस के नियमों का पालन करते हैं| क्या हमें हनुमान जी को अंडे का केक खिलाने और ऐसे ही अगंभीर मुद्दों को उठाने वालों को तूल देना बंद नहीं कर देना चाहिए?
बाकि अमरीकी इलेक्शन की कहानी चित्रो की जबानी|










02 November 2004

लिटमस टेस्ट भाग-दो



खबरदार, जो मुझे देशी कहा!

लिटमस टेस्ट भाग-एक नयी उम्र के एनआरआई तबके पर फिट बैठता है| अब चूंकि मेरी उम्र के या मुझसे उम्रदराज एनआरआई लोग सींग कटाकर बछड़ों में शामिल होने से रहे, तो उनके लिए पेश है लिटमस टेस्ट भाग-दो| यह लिटमस टेस्ट भाग-एक की सफलता से भी प्रभावित है|

हर प्रश्न से एक विकल्प चुनिए और देखिए आप कितने परफेक्ट एनआरआई बन चुके हैं|
प्रश्न १ : अपने उन्नत मध्यप्रदेश (यानि कि आपकी तोंद) को कम करने के लिए आप क्या करते हैं ?
क) आपने जिम, हेल्थ क्लब या फिर क्रैश डाईटिंग प्रोग्राम ज्वाईन कर रखा है |
ख) किसी स्टोर या गैराज सेल से ट्रेडमिल लाकर रखी है, जो दोचार महीने बाद जोश ठंडा होने की वजह से तौलिए सुखाने के काम आ रही है|
ग) ईन सब चीजों को आप समय व पैसे की बर्बादी मानते हैं और ऐसे फालतू चोंचलों से दूर ही रहना पसंद करते हैं|

प्रश्न २ : आप ग्रैंड कैनियन या वैसा कोई अन्य मशहूर पर्यटन स्थल किस तरीके से देखना पसंद करेंगे?
क) बकायदा AAA से यात्रा संबधी सहायक पुस्तकें, नक्शे लेंगे| ईंटरनेट पर छानबीन करेंगे| पहले से होटल, टूर वगैरह बुक करके यात्रा का कायदे से आनंद लेंगे| ग्रान्ड कैन्यन ही नहीं आसपास के अन्य आकर्षण भी देख डालेंगे|
ख) चिन्नास्वामी या श्रीमान चौरसिया को फोन करेंगे जो १९८४ में वहाँ जा चुके हैं| उनसे दो घंटे माथापच्ची करके पूरी जानकारी लेंगे| अंत में किसी दोस्त या पड़ोसी को साथ चलने के लिए पटाने के कोशिश करेंगे जिससे खर्चे व परेशानी दोनों आधे बँट जायें| सिवाय ग्रान्ड कैन्यन के और कहीं झाकेंगे भी नहीं क्योकि उनके बारे में चिन्नास्वामी या चौरसिया को भी कुछ नहीं पता|
ग) अपने शिकागोवासी दोस्त के लासएंजेल्स निवासी दोस्त को फोन लगायेंगे| उसके यहाँ रात में ठहरेंगे| सवेरे सात घंटे ३०० माईल्स ड्राईव करके ग्रान्ड कैन्यन जायेंगे| एक घंटे ग्रान्ड कैन्यन देखकर फ्रैंच फ्राई खाते हुए अपने शिकागोवासी दोस्त के लासएंजेल्स निवासी दोस्त के यहाँ रात को दो बजे खिचड़ी खायेंगे और उससे नयी अमरीकन वीसा पालिसी पर माथापच्ची करेंगे|

प्रश्न ३ : आपके हाटमेल या याहू ईमेल बाक्स पर अयप्पा स्वामी (या फिर संतोषी माता) का चमत्कार विषय की ईमेल आयी है| ईमेल में किसी तथाकथित चमत्कार का वर्णन है, साथ ही लिखा है कि अगर आपने उसे पचीस लोगो को फारवर्ड न किया तो आपका बेड़ागर्क हो जायेगा| आप क्या करेंगे?
क) आप ईमेल का जवाब लिखेंगे कि आपको ऐसी बेसिरपैर की कहानियों पर कोई यकीन नहीं| साथ ही यह जोड़ना नहीं भूलेंगे कि आईंदा कोई आपको ऐसी बेहूदा ईमेल भेज कर कामके वक्त परेशान न करें| ईमेल भेजने वाले को जलील करने के लिए आप रिप्लाई आल का बटन दबा देंगे| (एक यक्ष प्रश्न: कामके वक्त आप हाटमेल या याहू ईमेल देखते ही क्यो हैं? )
ख) आप बिना पड़े सीधे ईमेल डिलीट कर देंगे|
ग) आप दन्न से अपनी पूरी ईमेल ऐडरेस बुक (चाहे उसमें Clint Eastwood भी शामिल हो) को वह ईमेल फारवर्ड कर देंगे|

प्रश्न ४ : आपकी, अपनी मित्रमंडली को फोनकाल पालिसी क्या है?
क) सुबह दस बजेतक सोने के मुकाबले आप हरहफ्ते मित्रमंडली से गपशप को तुच्छ कोटि का कार्य समझते हैं|
ख) जरूरत पड़ने पर ही साल दो साल में काल करते है| काल करते ही मित्रों को काल न करने के लिए कोसते हैं| उनके शिकायत करने पर अतिव्यस्तता का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से साफ मुकर जाते हैं|
ग) कोई करे न करे नियम से, हर शनिवार सुबह आठ बजे से दस बजे तक मित्रमंडली में सबका दिमाग चाटते हैं|

प्रश्न ५ : आपकी सेलफोन (मोबाईल) पालिसी क्या है?
क) जब खुद को जरूरत पड़े तभी आन करते हैं| हरेक ऐरे गैरे नत्थूखैरे को अपना मोबाईल नंबर भी शान के खिलाफ समझते हैं|
ख) कालर आई देखकर सिर्फ काम की काल्स या काम के लोगों की काल्स रिसीव करते हैं| पर मुफ्त के वीकेंड मिनट गप्पबाजी में खर्च कर डालते हैं|
ग) मोबाईल फोन गैर जरूरी समझ कर लिया ही नहीं, चाहे किसी जगह जाने पर मैपक्वेस्ट से छापा रास्ता भटक जानेपर दस पेट्रोलपंपो से रास्ता क्यों न पूछना पड़े|

प्रश्न ६ : आपकी कमीज के कालर पर लेबल में क्या लिखा होता है?
क) Calvin Klein, Claiborne , Hilfiger या Kenneth Cole |
ख) Izod,Van Heusen या Bye One Get one free वाले ब्रांड्स|
ग) खालसा टेलर्स या रहमान टेलर्स|

प्रश्न ७ : आपके प्रिय विस्मयसूचक शब्द अब क्या हैं?
क) Oh Okey, Jesus Christ!, Boy o Boy!, Oh Sh@#t!
ख) अंग्रेजो के सामने: Oh Okey, Jesus Christ!, Boy o Boy!, Oh Sh@#t! हिंदुस्तानियों के सामने: हे भगवान!, अरे गजब ईत्यादि
ग) हिंदुस्तानियों के सामने: हे भगवान!, अरे गजब ईत्यादि, अंग्रेजो के सामने: विस्मय करने से बचेंगे|

प्रश्न ८ : आपको एक मित्र की फोनकाल आती है कि संप्रग सरकार राजग सरकार की स्वर्णिम चतुर्भज योजना पलटने वाली है| मित्र आपको एक घंटा चाटने के मूड में है| आपका कैसी प्रतिक्रिया जाहिर करेंगे?
क) आप कंधे उचका कर कह देंगे कि संप्रग या राजग किस चिड़िया का नाम है यह भी आपको नहीं पता| दरअसल आप हिंदुस्तानी वेबसाईट या न्यूज चैनल नहीं देखते| पर आप गे-राईट्स या ऐसा कोई भी विषय जिस पर फोन करने वाले मित्र की जानकारी जीरो बटे सन्नाटा है, बात करने को सर्हष तैयार हैं| आपके ताजा जानकारी के हिसाब से अभी नरसिंहराव प्रधानमंत्री हैं |
ख) आपको पिछले महीने से किसी हिंदुस्तानी वेबसाईट देखने का मौका नहीं मिला| वैसे भी हिंदुस्तान का कुछ नहीं हो सकता|
ग) आपको तो यह भी पता है कि रामगोपाल वर्मा की आने वाली फिल्म की हिरोईन का क्या नाम है|

परिणाम विश्लेषण
१) अगर आपके सारे जवाब (क) हैं तो
शत शत बधाई| आप अप्रवासी भारतीयों के पद्म विभूषण हैं| आपको एनआरआई श्रेणी में उच्च स्थान प्राप्त होने के कारण आपको कोई देशी कहने से पहले दस बार सोचेगा|
२) अगर आपके कुछ जवाब (ख) मगर ज्यादातर जवाब (क) हैं तो
आप काफी प्रगति कर चुके हैं| कुछेक साल डालरलैंड में रहने और दोचार सुपरबाऊल टूर्नामेंट देखने के बाद आप अप्रवासी भारतीय पद्म विभूषण पदक पर अपना दावा ठोंक सकते हैं|
३) अगर आपके कुछेक जवाब (ग) हैं तो
आप प्रगतिपथ पर हैं, भारतीय मंदिर जाना छोड़ कर YMCA की मेम्बरशिप ले लीजिऐ, अच्छे एनआरआई बन जायेंगे|
४) अगर आपके सारे जवाब (ग) हैं तो
आप यहाँ खामखाँ झक मार रहे हैं, आपकी कूपमंडूकता शिकागो में रहने से भी नहीं जायेगी चाहे आप इससे तो आप शिकोहाबाद में ही भले थे|