03 February 2005

ऐसा आफर रोज रोज नहीं मिलता!



अरे बाबा! मुझे लांग डिस्टेंस का आफर नहीं चाहिए.

अक्सर ऐसा होता है कि मैं शाम को मेज पर तसल्ली से खाना खाने के लिए बैठता हूँ| खाने का मजा दोगुना करने के लिए साथ में टीवी भी चला लेता हूँ| लजीज खाने और मजेदार पिक्चर के बीच अक्सर कवाब में हड्डी की तरह फोन की घंटी बज जाती है| फोन किसी जान पहचान वाले का हो तो फोन पर मुँह से चपर चपर करके खाते हुए बात करना काफी है, फोन करने वाला न सिर्फ माफी माँगेगा बल्कि गरज होने पर आपसे टाईम पूछ कर दुबारा फोन मिलाएगा| पर कभी कभी फोन कवाब का हड्डा साबित होता है| यह हड्डा Kawab ka hadda और कोई नहीं टेलीमार्केटर्स होते हैं| अपना नंबर मैने कटखने लोगों की सूची में भी डलवा दिया पर यह प्रावधान न जाने क्यों फोन कार्ड बेचने वाली देशी कंपनियों पर लागू नही होते| माना कि मेरी तरह टेलीमार्केटर्स भी भारतीय हैं, ईंसान हैं और नौकरी ही कर रहे हैं, पर अगर मुझे उनके फोन कार्ड में दिलचस्पी नहीं तो भी मधुमक्खी की तरह चिपके रहते हैं कि "ले लो भाईसाहब इससे सस्ता नहीं मिलेगा|" एक ऐसे ही दिन खाना खाते खाते दो-दो टेलीमार्केटर्स को समझा चुका था कि मुझे कोई फोन कार्ड (जानिए लांग डिस्टेंस प्लान के बारे में या कालिंग कार्ड के बारे में) नहीं लेना, कि दो मिनट बाद तीसरा फोन आ धमका| फोन कालटूईंडिया कंपनी से किसी प्रीति जिंटा का था| खाने का मजा खराब हो रहा था|आगे हुई बातचीत का मुलाहिजा फरमाईये|
मैं: हलो
प्रीति जिंटाः नमस्कार, मैं कालटूईंडिया कंपनी से प्रीति जिंटा बोल रही हूँ| सर आप ईंडिया काल तो करते ही होंगे?
मैं: जी नहीं|
प्रीति जिंटाः क्या? आप कभी ईंडिया काल नहीं करते?
मैं: क्यों, क्या Manmohan Singh ने सारे देशियों को ईंडिया काल करना कंपसरी कर दिया है?
प्रीति जिंटाः नहीं नहीं, दरअसल कालटूईंडिया कंपनी ने बड़े सस्ते रेट डिक्लेयर किये हैं|
मैं: पर बहन जी मैं ईंडिया काल नहीं करता|
प्रीति जिंटाः दोस्तो को भी नहीं|
मैं: जी मैं अपने किसी भी दोस्त को दस सेंट खर्च करके फोन करने के काबिल नहीं समझता |
प्रीति जिंटाः रिश्तेदारों को करते होंगे|
मैं: उनसे भी नहीं करता|
प्रीति जिंटाः परिवार वालो से?
मैं: दरअसल मैं बहुत ही खड़ूस और नान रिलायबल ईंडियन हूँ, आप मेरी Praveen Togadia से शिकायत तो नहीं करेंगी कि मैं किसी भी हिंदुस्तानी को घास नहीं डालता?
फोन खटाक से रखे जाने की आवाज आती है| तय है कि कालटूईंडिया कंपनी ने मुझे ब्लैक लिस्ट कर दिया होगा|
इसके बाद ईत्मीनान से बाकि बचा खाना खाया| टीवी पर चल रही पिक्चर का आधा मजा प्रीति जिंटा चौपट कर ही चुकी थी कि फिर से फोन बज गया| फोन उठाया तो पता चला एटीएंडटी वाले लांग डिस्टेंट सर्विस बेचने की गुहार लगा रहे थे| सामने लगी श्रीकृष्ण जी की तस्वीर मुझसे कह रही थी कि हे महात्मा गाँधी के सच्चे अनुयायी तेरी पिक्चर का बेड़ा गर्क कर ही दिया इन टेलीमार्केटर्स ने| जब ये तेरे समय का लिहाज नहीं करते तो तू क्यों सदाशयता का चोला ओढे बैठा है| उठ और मुँहतोड़ जवाब दे इनको और अपने क्षत्रिय धर्म का पालन करके बता दे कि तेरे जैसे भारतीय भी किसी सनकी अमेरिकन से कम खड़ूस नहीं| इस आधुनिक आकाशवाणी का असर मेरी और एटीएंडटी के वार्तालाप पर कैसा पड़ा देखिए, और सोचिए कि आप भी टेलीमार्केटर्स से निपटने में क्षत्रिय धर्म का पालन करेंगे या फिर गाँधीवादी तरीके से अपने बहुमूल्य समय का सत्यानाश करवाते रहेंगे?
मैं: हलो!
एटीएंडटीः क्या आप मि. अरोरा बोल रहे हैं?
मैं पहले आप बताईये मैं किससे मुखातिब हूँ?
एटीएंडटीः जी, मैं एटीएंडटी से राबर्ट डी कोस्टा Robert D'Costa बोल रहा हूँ|
मैं: आप एटीएंडटी से बोल रहे हैं?
एटीएंडटीः जी, मैं एटीएंडटी से ही बोल रहा हूँ|
मैं: एटीएंडटी, फोन कंपनी?
एटीएंडटीः जी हाँ, फोन कंपनी|
मैं: ओहो फोन कंपनी! मैं समझा कि आप एटीएंडटी से बोल रहे हैं|
एटीएंडटीः जनाब एटीएंडटी फोन कंपनी ही है|
मैं: पर मेरे पास पहले से दो दो फोन हैं| मुझे और फोन नहीं खरीदने|
एटीएंडटीः जनाब हम फोन नहीं बेच रहे हैं|
मैं: अगर आप फोन कंपनी से बोल रहे हैं और फोन नही बेच रहे तो मुझे क्यों फोन कर रहे हैं?
एटीएंडटीः देखिए हमारे पास आपके लिए एक टनाटन आफर है, एक मिनट के हिसाब से दस सेंट का, जो २४ घंटे, हफ्ते के सातो दिन पूरे साल लागू रहेगा|
मुझे पता था कि Robert D'Costa वस्तुतः मुझे एक मिनट के हिसाब से दस सेंट का लांग डिस्टेंट कालिंग प्लान बेच रहा था| पर मैनें अपना क्षत्रिय धर्म निभाना जारी रखा|
मैं: एक मिनट साहब| एक मिनट| आपने कहा एक मिनट के हिसाब से दस सेंट का, २४ घंटे का आफर|
एटीएंडटीः जी|
मैं: वह भी हफ्ते के सातो दिन|
एटीएंडटीः जी हाँ जनाब|
मैं: और वह भी साल ले पूरे ३६५ दिन|
एटीएंडटीः बिल्कुल साहब|
मैं: वाह क्या प्लान है| मुझे पसंद है|
एटीएंडटीः देखा साहब, हमें मालुम था आपको जरूर पसंद आयेगा|
मैं हाँ पसँद तो है| तो आप मुझे हफ्तावर पेमेंट करेंगे या साल के आखिर में पूरे $52,560 का चेक भेंजेगे? क्या मुझे अभी कुछ एडवासं मिल सकता है?
एटीएंडटीः जी, क्या मतलब?
मेरे इस पैंतरे से Robert D'Costa का मुँह जरूर खुला का खुला रह गया होगा|
मैं: मतलब अभी जो आपने कहा एक मिनट के हिसाब से दस सेंट वाला आफर|
एटीएंडटीः हाँ आफर तो एक मिनट के हिसाब से दस सेंट का ही है पर आप क्या कह रहे हैं?
मैं: अरे भाई, अभी आपने कहा कि आप मुझे एक मिनट के हिसाब से दस सेंट का २४ घंटे, हफ्ते के सातो दिन का आफर दे रहें हैं| तो एक दिन के हुए $144, हफ्ते के $1,008 per week और साल भर के $52,560 | तो आप यह भुगतान कैसे करेंगे?
एटीएंडटीः नहीं नहीं अरोरा साहब, हमारा मतलब आपको पैसे देने से नहीं है, बल्कि आपको एटीएंडटी को हर एक मिनट के दस सेंट के हिसाब से भुगतान करना होगा|
मैं: अरे, अभी आपने कहा आप एक मिनट के हिसाब से दस सेंट वाला आफर दे रहें हैं| आप वाकई एटीएंडटी से ही बोल रहे हैं न?
एटीएंडटीः हाँ भाईसाहब लेकिन..
मैं: लेकिन क्या? आप ही बताईये मैं क्या मतलब निकालूँ, एक तरफ आप कहते हैं आप मुझे एक मिनट के हिसाब से दस सेंट वाला आफर दे रहे हैं, तो फिर मैं एटीएंडटी को पैसे किस बात के दूँ? आप कहीं एमवे वगैरह वाली किसी नेटवर्कमार्केटिंग कंपनी का कोई प्लान तो नहीं भेड़ रहे हैं? मैने अखबार मे पढा था उस बारे में|
एटीएंडटीः नहीं नहीं भाईसाहब, मैं आपको एटीएंडटी का एक मिनट के हिसाब से दस सेंट वाला आफर ही ...
मैं: फिर वही बात| आप तो मुर्गे की एक टाँग पकड़ कर बैठ गये| आप अपने सुपरवाईजर से बात कराईये|
एटीएंडटीः (घबराते हुए) अजी इसमें सुपरवाईजर को घसीटने की क्या जरूरत है? मैं समझा तो रहा हूँ आपको?
मैं: (कर्कश आवाज में) अमाँ अजीब खब्ती किस्म के ईंसान हो तुम, मुझे तुम्हारी समझ पर यकीन नहीं| मुझे तो अब तुम्हारे सुपरवाईजर से ही बात करनी है|
एटीएंडटीः (झल्लाते हुए) अच्छा , एक मिनट होल्ड करिए|
थोड़ी देर बाद सुपरवाईजर साहब लाईन पर हाजिर हुए|
सुपरवाईजरः नमस्कार अरोरा साहब| शायद आपको हमारा प्लान समझने में दिक्कत हो रही है|
मैं: आप भी एटीएंडटी से ही बोल रहे हैं?
सुपरवाईजरः (स्वर में यथासंभव नर्मी लाते हुए) जी हाँ, मैं एटीएंडटी से ही बोल रहा हूँ|
मैं: दरअसल मैं किसी जिम्मेदार व्यक्ति की आवाज सुनकर तसल्ली करना चाहता था| मुझे आपका आफर पसंद है| मुझे क्या करना होगा?
सुपरवाईजरः मैं वापस आपको आपरेटर से कनेक्ट करता हूँ|
किस्मत का मारा Robert D'Costa फिर से लाईन पर आ गया|
एटीएंडटीः हाँ तो अरोरा जी, आपको हमारा प्लान पसँद आ ही गया| तो क्या मैं आपको इसके लिए साईनअप कर दूँ?
मैं: बड़े भाई, अगर आपके जैसे गाँठ के पूरे दोचार दरियादिल और मिल जायें, जो मुझे बैठे ठाले साल के $52,560 देने को तैयार हों, तो जिंदगी में कोई टेंशन नही| आप के बाल बच्चे जियें, बड़े होके आपका खून पिएँ, आपकी .....
खटाक! यह Robert D'Costa की तरफ से फोन पटकने की आवाज थी|

2 comments:

Anurag said...

wah wah! maza aa gaya. Especially that pic of Gulshan Grover is sone pe suhaaga. Creativity at its best!

Jitendra Chaudhary said...

वाह अतुल भाई, क्या ढूँढ के लाये हो,
मजा आ गया, बहुत दिनो बाद मूड मे लिखे हो, बहुत अच्छे,
थोड़ा जल्दी जल्दी लिखा करो यार.

भइया,ये तो हाल आफ फेम मे डालने लायक है...बोलो क्या कहते हो?