22 February 2005

अनुगूंज ६: चौथा आयाम!

Akshargram Anugunj
अनुँगूँज का विषय है चमत्कार और मुझे किसी विशेष चमत्कारी घटना का व्यक्तिगत अनुभव नहीं| फिर भी कभी कभी कुछ हस्तियों से मुलाकात होती है जो भविष्य की या ऐसी घटनाओं के विषय में बता देते हैं जो उन्होंने खुद न देखी न सुनी| ऐसे ही एक बार एक सिद्ध पुरुष से इस विषय पर वार्तालाप हुआ| उनका विचार था कि वैज्ञानिक तौर पर हम त्रिआयामी विश्व को मानते हैं| अगर चौथा आयाम हम समय का मान ले जिस के सापेक्ष भ्रमण करने की अभी तक वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है तो यही भविष्य या भूतकाल का दर्शन है| उनके मतानुसार योगी पुरूष कुडंलिनी जागरण के द्वारा सूक्ष्म शरीर विचरण कर सकते हैं और जब वे इस चौथे आयाम के सापेक्ष भ्रमण करते हैं तो वह सब कुछ देख सकते हैं जो हो चुका है या जो होने वाला है| दरअसल उन घटनाओं से प्रकाश उर्जा निकलती है| अगर कोई प्रकाश की गति से तेज चल सके तो भविष्यदर्शन चमत्कार नहीं कहलायेगा| एक फिल्म में इस विषय पर बड़ा सटीक डायलाग है| मोथमैन प्रोफेसीस में रिचर्ड गेरे एक छोटे कस्बें में होने वाली विचित्र घटनाओं के संदर्भ में एक प्रोफेसर से मिलते हैं| दरअसल उस कस्बें में कुछ लोगो को एक विचित्र आकृति भविष्य में होने वाली दुर्घटनाओं की भविष्यवाणी कर देती थी| प्रोफेसर रिचर्ड गेरे को सामने बनी एक बहुमंजिला इमारत की ओर ईशारा करके कहते हैं, कि यदि उस इमारत के पचासवीं मंजिल पर बैठा कोई आदमी मुझे यहाँ से दस मील दूर हुई किसी दुर्घटना का सेलफोन पर वर्णन करे तो उसकी क्या व्याख्या होगी| यही न कि मैं जिस उँचाई पर हूँ वहाँ से मुझे दो मील भी नहीं दिखता जब्कि उस आदमी को उसकी उँचाई से दस मील तक दिखता है| यही बाद भविष्यदर्शन पर लागू होती है| सारा रहस्य सिर्फ ऊर्जास्तर के भिन्न होने का है| आपको उस ऊर्जास्तर पर जाकर भविष्य दिख सकता है पर आप उसे बदल नही सकते|

4 comments:

Tarun said...

अतुल भाई, चिठा तो अच्छा तैयार किया है॥ अमेरिका यात्रा तो बहुत रोचक लिखी है॥ अपना भी एक संस्मरण है, काफी वक्त लगेगा हिन्दी मे लिखने मे॥ अच्छा लगता है हिन्दी को इंटरनेट पर देख के॥

Tarun said...
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Tarun said...
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Tarun said...
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