10 March 2005

हर्शी, क्रिसमस और गोविंदाचार्य














हर्शी चाकलेट का नाम सुनते ही मुँह में पानी आ जाता है| पिछली क्रिसमस पर हर्शी चाकलेट फैक्टरी देखने का मौका मिला| चाकलेट फैक्ट्री में एक छोटा मोटा टूर है जिसमें आप स्वचलित ट्राली में बैठे बैठे चालकेट निर्मान प्रक्रिया से रूबरू होते हैं| साथ ही एक त्रिआयामी चलचित्र का भी प्रदर्शन है जो शुरू होता है चाकलेट के ईतिहास से पर बीच में कई कार्टून चरित्र आकर जबरदस्त धमाचौकड़ी मचाते हैं| वैसे पूरी फिल्म बच्चो के लिए थी पर एक दृश्य अमेरिकी व्यापारिकता के दर्शन का गूढ रहस्य समझाने के लिए पर्याप्त है| उस दृश्य में दिखाया गया है कि एक मेहनतकश इंसान चाकलेट एक ठेले पर आवाज लगा लगाकर चाकलेट बेचता है बिल्कुल पुरानी फिल्मो के बलराज साहनी कि तरह| पर उसे कुछ खास हासिल नहीं हिता तभी अगले दृश्य में एक सर्कस धमाकेदार तरीके से अवतरित होता है जहाँ हर तरह कि चाकलेट रंग बिंरगे आवरणों में सजी हैं और हर तरह के तमाशे के बीच खूब बिक्री हो रही है| संदेश स्पष्ट है गोविंदाचार्य जी कि वीरेंद्र सहवाग,मंदिरा बेदी और अमिताभ बच्चन के विज्ञापनों की सपनीली दुनियाँ में इस कदर मदहोश भारतीयों को आपकी स्वदेशी की आवाज नक्करखाने में तूती की भाँति नहीं सुनायी देगी | आखिर में एक पार्क में क्रिसमस के अवसर पर एक पार्क में आयोजित लाईट शो देखा| प्रवेश द्वार पर तैनात प्रहरी आपको बता देते हैं कि अपनी कार के अमुक रेडियो स्टेशन को आन करिए जो क्रिसमस के गाने प्रसारित कर रहा है| पूरे दो मील के दायरे में फैली यह प्रदर्शनी आप अपनी कार में मंथर गति से चलते हुए देखते हैं ताकि बाहर पड़ती कड़कड़ाती ठंड आपका मजा किरकिरा न कर सके| बेहरतरीन आईडिया है, पार्क में बड़े पैमाने पर साउँड सिस्टम लगाने का झंझट बच गया और दर्शको को भी पूरा आनँद मिलता है|

3 comments:

अनुनाद सिंह said...

छवि प्रदर्शनी बहुत अच्छी लगी ।
प्रोपेगैन्डा और ऐड से बडे-बडों का ब्रेन-वाश हो जाता है । जन सामान्य कहाँ लगता है ?

मिर्ची सेठ said...

भाई कैमरा कौन सा प्रयोग करते हो और फोटू चलती कार से लिए या रोक कर तसल्ली से लिए हो। का है कि रात के समय चलती कार से फोटू लेने में बड़ी तकनीक का इस्तेमाल करना पड़ता है।

Atul Arora said...

छुटका सा कैमरा है हमारा| अब क्या है कि दान में मिली बछिया के दाँत नहीं गिनते इसलिए इसके फीचर वगैरह पर मत जाईये| क्रेडिट कार्ड के प्वाईंटस कैश कराने को यह कैमरा ले लिया वर्ना श्रीमती जी उसमें बर्तन ले डालती| यह रात वाले फोटो रूकी या मंथर गति से चलती कार से खीँचे गये हैं|