16 March 2005

बिल्लू भईया की नसीहतें (हिंदुस्तानी अँदाज में)

बिल गेट्स ने ११ नियम संपादित किए है जो छात्र स्कूल कालेज में नहीं सीखते| उनका मानना है कि हमारी दिवास्वपनों में रहने की आदत और शिक्षा में राजनीतिक हस्तक्षेप ने ऐसे छात्रों की जमात तैयार कर दी है जिनका जिंदगी की वास्तविकताओं से दोचार न होने के कारण असफल होना अवश्यंभावी है|
१ जिंदगी रहमदिल नही हैं, इस हकीकत से रूबरू हो जाओ|
२. दुनिया तुम्हारे स्वाभिमान को भाव नही देती| दुनिया उम्मीद करती है कि तुम अपने मुँह मियाँ मिठ्ठू बनने से पहले कुछ करके दिखाओ|
३. तुम कालेज से निकलते ही डालर चित्त करना नही शुरू कर सकते| कान में सेलफोन लगाये , मर्सीडीज पर बैठे खुद को किसी कंपनी के वाईस प्रेसीडेंट की कुर्सी पर बैठे मुंगेरी लाल के हसीन सपने देखना छोड़ो| पहले वाईस प्रेसीडेंट बनने की सोचो फिर सेलफोन और मर्सीडीज के ख्वाब देखना|



आप सुन रहें हैं?


४. अगर तुम सोचते हो कि तुम अपने अध्यापक से आजिज आ गये हो तो जरा ईंतजार करो किसी अधिकारी के अधीनस्थ काम करने का| तुम्हें हर साल नये अध्यापक की तरह हर साल भर बाद नया अधिकारी नही मिलने वाला |
५. परचून की दुकान में बिक्री करने से औकात नहीं घटती| आपके पिता इस काम को जीविका चलानें के नाम से जानते हैं और उन्होने इसे अपनी शान में गुस्ताथी कभी नहीं माना तो आप क्यों मानते है?
६. अगर आपने कोई भूल की है तो दोष अपने माता पिता पर क्यों लादते हो, इसलिए अपनी गलती पर स्यापा बंद करके उससे सीख लो|
७. आपके माता पिता आपके अवतार लेने से पहले ऐसे बोर किस्म के नही थे| आपके खर्चे उठाते-उठाते,आपके कपड़े धोते-धोते और यह सुन-सुन कर कि आप कितने कूल है, उनकी यह गति हुई है|
८. अभी आपके कालेज ने ही विजेताओं और पराजितो का फैसला सुनाया होगा, जिंदगी ने नही| कुछ स्कूलों ने फेल करने की प्रथा समाप्त कर तब तक प्रयत्न करने की व्यवस्था दी है जब तक सफलता न मिले| पर जिंदगी में ऐसी किसी भी व्यवस्था का नामोनिशान तक नही है|
९.जिंदगी , कालेज की तरह सत्रों में बंटी नही होती| इसलिए आपको जिंदगी में सत्रावकाश भी नही मिलता और बहुत कम नियोक्ता आपको यह सिखाने में रुचि रखते हैं| यह गुर तो आपको खुद सीखना पड़ता है|
१०. टीवी जिंदगी नही है| असल जिंदगी में लोगो को चाय की चुस्कियाँ छोड़ कर काम करना पड़ता है|
११. सनकियों के प्रति उदार रवैया अपनाना सीखो| तुम्हें किसी सनकी के अधीन ही काम करना पड़ सकता है|

2 comments:

Vijay Thakur said...

नसीहत तो नसीहत ही है चाहे बिल्लू भैया का हो या कल्लू भैया का ज़िंदगी तो नित सीखने का काम है और आप जो करते हैं अगर आपको गलत लगे तो उसे न दोहराने का नाम है। ऐसे बिल्लू भैया के हर नसीहत पर विस्तार से बात की जा सकती है, फिलहाल टिप्पणी को टिप्पणी जैसा ही रहना चाहिये, इसलिये उदाहरण के तौर पर अंतिम नसीहत को ही ले लीजिए ये कहता है आपको ये यही के घोंट लो गला अपना, संघर्ष की कोई जरूरत नहीं।

SV said...

I would like to invite you to join us for the "First Annual Northeast
Desi Blogger Meet' in NYC. Check out the details and let me or anyone
in the list know if your are coming.

http://sv.typepad.com/forsv/2005/03/east_coast_desi.html

Thanks,

SV