06 April 2005

मुशर्रफ मियाँ के खिलाफ भारतीय ब्लागजगत की मुहिम


कारगिल प्रकरण के जन्मदाता मुशर्रफ मियाँ भारत तशरीफ ला रहे हैं| अभी कुछ दिन पहले उनकी माँ और बेटो का अच्छा खासा इस्तकबाल हुआ था, अलीगढ और लखनऊ में| अब दो खेमों ने तलवारे तान ली है|
अमन के पुजारियों का मानना है:


  • हमें शांति व्यवस्था की बहाली के काम करना चाहिए|
  • भारत पाकिस्तान द्वारा आर्थिक सहयोग बढाने से पारस्परिक वैमनस्यता कम होगी|
  • हर साल बाघा पर मोमबत्ती लेकर जाने वाले कुलदीप नैयर तो दो कदम आगे बढकर पाकिस्तानियों को चीन से सीख लेने को कह रहे हैं| जिस तरह चीनियों ने व्यापार की खातिर अरूणांचल को ढंडे बस्ते में डाल दिया है वैसे ही पाकिस्तानी भी काश्मीर मे कुछ समय के लिए बर्फ क्यो नहीं जमी रहने देते?
  • सबसे दमदार तर्क तो यह है कि बंदरो (पाकिस्तान भारत) की लड़ाई से बिलौटे (लाकहीड-मार्टिन) को फायदा हो रहा है|

अब जरा उनकी बात सुने जिनकी भृकुटी तनी हैं:

  • मुशर्रफ मियाँ ने ही कारगिल प्रकरण के द्वारा लाहौर घोषणा को पलीता लगाया था|
  • हमारे नेताओं द्वारा कारगिल के खलनायक के स्वागत में पलक पांवड़े बिछाने से, कारगिल में मारे गये शहीदो के परिवारो के दिल पर क्या गुजरेगी?
  • मुशर्रफ मियाँ ने तो अभी भी काश्मीर और कारगिल का आलाप नही छोड़ा है| यहाँ तक कि उनका खुद का जाल स्थल भारत को पाकिस्तान का मुख्य शत्रु मानता है|
  • सीमापर आतंकवाद अब भी जारी है|
  • व्यापारिक संबधो के पैरवीकार बताये कि पाकिस्तान हमें वरीयता प्राप्त राष्ट्र का दर्जा देने में आनाकानी क्यों कर रहा है?

इस मुद्दे पर ब्लागजगत में भी स्पंदन हो रहा है| जिस तरह से कुछ अंग्रेजी ब्लागर लामबंद हो रहे हैं , लगता है कि राजनैतिक खेमेबंदी ब्लागजगत में भी पैठ बना चुकी है||

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