13 April 2005

क्या आप इस धर्माधँ को थप्पड़ मारके जगा सकते हैं ?

इस व्यक्ति का मानना है कि यह बिहार के लाखो लोगों का सच्चा प्रतिनिधि है|



तमाशे में हम किसी से कम नहीं
वैसे इनकी पार्टी को तमाम वोट भी मिले हैं और सीटे भी| पर यहाँ उठाया गया मुद्दा भिन्न है| अगर कोई एक नेता हिंदुवादी होने का दंभ भरकर ताजमहल पर कब्जे की बात करे या फिर गुजरात में क्रिया प्रतिक्रिया का नया नियम प्रतिपादित करे तो दस नेता , एक हजार अखबार और कम से कम दस हजार ब्लाग उस की धज्जियाँ उड़ाने में पीछे नहीं रहेंगे| अगर पड़ताल करें तो हिंदु धर्म के उन तथाकथित ठेकेदारों की मिट्टी पलीद करने वाले ज्यादातर सज्जन स्वंय हिंदु होते हैं| यह दर्शाता है कि एक विभाजन और सैकड़ो दंगो के बाद भी हमारा धर्मनिरपेक्ष चरित्र अभी क्षतविक्षत नही हुआ और हम किसी भी धर्म के ठेकेदार को बता सकते हैं कि त्रिशूल चमकाने से कोई सच्चा हिंदू नहीं बन जाता | पर इसका उल्टा मुझे क्यो नहीं दिखता | जरा रामविलास पासवान जद (यू) से गठजोड़ हेतु रखी गई शर्तों पर नजर डालिए|

  • पहली शर्त है नीतिश और शरद भाजपा जैसी सांप्रदायिक पार्टी का साथ छोड़े|
  • दूसरी शर्त है बिहार का अगला मुख्यमंत्री मुस्लिम हो|

भाजपा सांप्रदायिक है या नहीं यह विवाद का विषय हो सकता है| भाजपा को सांप्रदायिक मानने वाले ऐसा इसलिए मानते हैं कि वह हिंदुओ की हितैषी है| पर किसी राज्य का प्रतिनिधि होने की शर्त उसका सुयोग्य,ईमानदार,कुशल प्रशासक होने की जगह धर्म विशेष (चाहे वह कोई भी धर्म का हो) होने का माँग करने से रामविलास जी क्या खुद सांप्रदायिक नहीं हैं? मुझे ताज्जुब सिर्फ यह है कि इस पर दस नेता नहीं बोले, न ही बोले एक हजार अखबार| बोली तो सिर्फ एक वेब साईट| मुझे नहीं पता कि मेरा ब्लाग, मेरा कोई मुस्लिम भाई पड़ता है कि नहीं| पर अगर पड़ता है तो यह टिप्पणी जरूर करे कि अगर नरेंद्र मोदी सांप्रदायिक हैं तो रामविलास को आप क्या दर्जा देंगे? क्या उसने कभी मुस्लिम समाज के उत्थान के लिए स्कूल कालेज खुलवाने की, गरीब मुस्लिम छात्रो को छात्रवृति देने की (आरक्षण की भीख नहीं), गरीब मुस्लिमों के मुफ्त ईलाज की पहल की है| अगर आप कम्युनिस्ट कांग्रेसी या गैर सांप्रदायिक विचारधारा से प्रेरित हैं या फिर मुस्लिम हैं तो बतायें कि रामविलास की इस तरह की माँग को सांप्रदायक क्यो ना माना जाये| अगर नहीं तो कृपया मेरी आँखे खोलिए कि मुझे रामविलास क्यो मुस्लिमो को उल्लू बनाते नजर आ रहे हैं और कोई भी मुस्लिम या धर्मनिरपेक्षी उन्हें वैसे ही जवाब नही दे रहा जैसे नरेंद्र मोदियों ,प्रवीण तोगड़िया और बाल ठाकरे को दिया जाता है|
वैसे मैं यह भी जोड़ना चाहूँगा कि यह वही रामविलास है जिसने पाकिस्तान में मुशर्रफ मियाँ को खुद का परिचय सबसे ज्यादा मतों से जीतने वाले पर गुजरात के दंगो के विरोध में मंत्रीपद को लात मारने वाले शख्स की हैसियत से दिया था| वह बात अलग है कि उनको खुद मुशर्रफ मियाँ ने घास नही डाली| गुजरात हमारा अँदरूनी मामला है|मैं मानता हूँ कि हमारे मुस्लिम भाईयो को देशप्रेमी होने के लिए ठाकरे या मोदी के सर्टिफिकेट की कतई जरूरत नही| तो फिर रामविलास को धर्मनिरपेक्ष होने के लिए गैर मुल्क के तानाशाह से सर्टिफिकेट लेने की क्या जरूरत थी| अगर उन्हे कोई ऐसा सर्टिफिकेट मुशर्रफ मियाँ दे देते तो क्या हिंदुस्तानी मुस्लिम भाई उसे मँजूर कर लेते? मुझे यह भी मालुम है कि इरफान पठान ईंजमाम उल हक की गिल्लियाँ बिखेरते यह नहीं सोचते कि वे खुद या ईंजमाम मुस्लिम हैं, न ही किसी मुस्लिम हिंदुस्तानी फौजी के हाथ काँपते हैं जब दुश्मन के रूप में पाकिस्तानी फौजी सामने होता है| तो फिर पराये मुल्क के तानाशाह के सामने अपने घर के झगड़े का खुलासा करना कहाँ की समझदारी है? अपने फायदे के लिए अपने ही मुल्क की दो कौमों के बीच जहर बोने वाले ऐसे शख्स को अगर मुस्लिम ही जवाब दें तो मजा आ जाये|

7 comments:

अनुनाद सिंह said...

गनीमत है उन्होने गिलानी को मुख्यमंत्री बनाने की शर्त नही रखी |

अनुनाद

Vijay Thakur said...

थप्पड़ लगाने का ज़माना आने में थोड़ा और वक़्त लगेगा शायद। वैसे जनता इतनी चू… नहीं हैं। सब मालूम है एक साथ सूद समेत हिसाब क़िताब वसूल करती है।

MANOJ said...

Bhaiya main tumhara blog kabhi-kabhar dekh liya karata huin,lekin es posting ne nirash kiya.

Ramvilash ki yah mang utana hi sahi ya galat hai jitana yah kahana ki main kisi Harijan ko bharat k Pradhan Mantri k pad par dekhana chahata huin(Gandhi)

Nahin! Aap bhram mein Nahin Padana, main RamVilash ko Gandhi kya kisi v bade saf-suthari chhavi wale neta k samakashh rakhane ki kossis nahi karunga.Itani bebakufi ki apekshha mujhase nahin rakhhen.

Lekin yah yaisa hi Masala hai jaisa UP mein Jatiye GaNit k hisab s kabhi Kalyan Singh aur Kabhi dusare Singh ko aur Jharkhand mein Kabhi Mundajee aur Marandi je ko CM banana.

Yah jatiye GaNit kaa vaisa hi khel hai jaisa Kendrya Cabinet mein Jati k hisab s sabako adjust karana,khastaur par vaisi jatiyon ko pratinidhitv dena jinaka mat ruling Party k liye crucial hai.

Jab Mohd. Shahnawaj Hussain KO civil Aviation Minister banaya gaya to mere khyal se jarur uname es pad ki yogyata rahi hogi.

Jatiye aur samudayik pahachano k bich chal rahi Bharat ki loktantrik rajniti kaa yah pratifalan hai.Es paripekhay mein hi es masale par vichar ho sakata hai.

Aur Gujarat se isaki tulana nahi ho sakati hai.Gujarat mein mahaj ye nahin hua ki kisi Muslim ko pad dene k mamale mein discriminate kiya gaya,vahan state k active support se Blatkar,hatya jaise mamale huye.Aur aaj v vahan sthiti samanya nahi hai.

EK NIJI ANURODH - Bihar k sabase corrupt aur criminal neta k bare mein bat karate huye v Modi, Togadiya ya Thackarey se usaki tulana nahi karen.

Ham Bihariyon ki jo image hai usame yah baat aapakoo atapati lagegi , lekin ek baar sochana jaroor.

Aur aapase kisane kah diya ki Rmvilash k es prastav par hajaro akhawaron aur blogaron ne Paranoic reactions nahi de rahe hain.
regards

Atul Arora said...

विजय भाई और अनुनाद जी आप ने मुद्दे को बिल्कुल सटीक पकड़ा है| मनोज भाई मेरा ब्लाग पड़ने और टिप्पणी के लिए धन्यवाद| गुजरात पर, जातिवाद पर न जाने किनता लिखा जा चुका है पक्ष में भी और विपक्ष में भी| मैं सिर्फ एक आम आदमी की तरह सोच रहा था कि अगर नरेंद्र मोदी सांप्रदायिक है तो धर्म विशेष के लिए मुख्यमंत्री की माँग करना सांप्रदायिकता नहीं है क्या? वैसे आपके उठाये सभी प्रश्न जायज है पर केंद्र में या राज्यो की राजनीति में जातीयता पर अलग से महाग्रंथ लिखा जा सकता है और मेरी समझ में वह भी उतना ही गलत है| ज्यादा दूर की छोड़िए , मेरे अपने शहर कानपुर में भाजपा नें लोकसभा चुनाव में ब्राहम्ण वर्ग को लुभाने के चक्कर में अपनी ही मिट्टी पलीद करवा ली और मेरे विवार से उन्हे बिल्कुल ठीक सबक मिला| विजय भाई का कहना बिल्कुल सही है, हमारी जनता सही निर्णय करती है पर न मीडिया को समझ में आता है न नेताओं को| रही बात यह कहने की कि इस मुद्दे पर किसी अखबार या ब्लागर ने नही लिखा तो यह मेरी बर्र का छत्ता छेड़ने की कोशिश थी , इससे पता चलेगा कि आम राय क्या है?

MANOJ said...

"इससे पता चलेगा कि आम राय क्या है"

Aap aam ray kp NET use karane wali Janata kaa Bahumat Kah Lijiye.Bahumat ki loktantra mein ek LEGITIMACY hai,isliye mujhako aapatti nahin hogi.

Lekin jab-tab istemaal hone wale aam-adami,aam-ray jaise Muhawaron ko main sandeh ki dreishhti se dekhata huin.Es dunia mein har har aadami khas hai.

Kisi ne kaha hai- "COMMON SENSE IS VERY UN COMMON."

Matalab ye ki common sense apane samay ki PRABHTVASHALI VICHARADHARA Ko paratibimbit karata hai.

Vaise v aap sab log khas hain.24 hour net excess pade-likhhe bharatiyon k liye v priviledge hai.So yah meri taraf se abhi k liye aakhiri posting.

Asha hai main utana katkhana nahi huin , isliye aapako barre k chhatte mein hath dalane kaa ahasas nahi hoga.

Kas ki main devnagari mein type kar sakata

Tarun said...

Ye sahab aise hi bhonkte rahenge inko shayad hi koi ghas daale, inke thappar khane ke din gaye laat aur ghunso ki baat kijye.....

गुरू लोगों एक कहानी लिखनी शुरू की है, आप लोगों की टिप्पणी का आकांछी हूँ, अगर सही लग रही हो तो अंजाम तक पहुँचाऊँ॥

प्रवीण शुक्ल (प्रार्थी) said...

नमस्कार अतुल जी आप का ब्लॉग पढ़ा बहुत उचित और सटीक लिखा है आप ने , हमारे अगर किसी नेता को धर्म निर्पेक्षता का इतना ही चस्का है तो वह धर्म निर्पेक्ष हो सकता है पर मुस्लिम तुस्टीकरण करके धर्म निर्पेक्षता का आडम्बर करना मुझे तो निरी मूर्खता लगती है | खैर बहुत अच्छा लिखते है शुभ कामनाये