03 May 2005

क्योंकि भैंस को दर्द नही होता! [भाग २]

हाँ तो जनाब बात हो रही थी झींझक की। झींझक में एक गाँव है सिठमरा। यहाँ की तीन महिलाओं की दासतान इस आलेख के जरिए आप तक पहुँचायी जाने वाली है। यह तीनो महिलाऐं गाँव के मध्यम आयवर्ग का प्रतिनिधित्व करती है। इनके में से एक का पति खेती करती है, दूसरी का पति ग्वाला है और तीसरी के पति की परचून की दुकान है।


परचून की दुकान
परचून की दुकान
हाँ, मुझे मालुम था कि आप में से कुछ जरूर पूछेंगे कि परचून की दुकान में चूना बिकता है कि चूरन, तो जवाब यह है कि दोनो बिकते हैं। यह भारत के आदर्श गाँव का वालमार्ट है। अब अगर आपकी जिज्ञासा की पिपासा शाँत हो गयी हो यह भी बता दूँ कि इन तीनो महिलाओं का नाम है कमला,विमला और अमला। नाम से यह तीनो बहने लगती है पर इस लेख के लिए यह महत्वपूर्ण नही है। यह तीनो काफी अच्छी सखियाँ हैं और जिस जमाने में मैं हाफपैंट पहन कर कानपुर शहर के श्याम नगर में साईकिल से किदवई नगर ट्यूशन पड़ने जाता था, तब से यह एक दूसरे के पड़ोस में रह रही हैं। उस समय तो मैनें अमेरिका की सूरत सिर्फ हिंदी फिल्म के गानो में देखी थी जिसमें राजकपूर,अमिताभ बच्चन या धर्मेद्र विदेशो की गलियों में ठुमके लगा रहे होते थे जब्कि

कमला,विमला और अमला
कमला,विमला और अमला
कमला,विमला और अमला इंतजार कर रही थीं कि कब ज्ञानी जैल सिंह उनके गाँव के बाहर लगी दूरदर्शन की छतरी का उदघाटन करने आयें। और वे सखियाँ भी देखे टीवी पर गब्बर सिंह को बसंती पर चिल्लाते हुए कि "अरी ओ छमियाँ, जरा हमको भी तो दिखाओ दो चार ठुमके!" यह तीनो सखियाँ पति सेवा, सास सेवा, गृह सेवा के अतिरिक्त प्रतिदिन शिव मंदिर की सेवा भी करती थी जो इनके पड़ोस वाली गली से बाहर जाने पर बहने वाली नहर के किनारे स्थित है। हर सोमवार को यह तीनों निर्विघ्न रूप से व्रत भी रखती आ रही हैं। अब इनके द्वारा की जाने वाली सेवाओं में से सास एवं गृह सेवा का काम बहूसोर्स हो गया है। अरे चौंकिए नही, यह कोई नही गुत्थी नही है। मैने तो सिर्फ एक नया शब्द इजाद करने की कोशिश की है। जैसे अमेरिकी कंपनियाँ अपने ऊबाऊ काम को चीन और भारत में आऊटसोर्स करते हैं वैसे इन तीनों सखियों की पदोन्नति हो चुकी है और यह सासे बन चुकी है। अतः सास एवं गृह सेवा का काम अब ईनकी बहुऐं करती हैं। तो बताईये कि यह कर्तव्य का हस्तांतरण बहूसोर्सिंग नहीं कहलायेगा तो क्या लाजिकल प्रोसेस माडलिंग कहलायेगा? खैर तब इनकी शिवशँकर जी से प्रार्थनाओं की लिस्ट बहुत छोटी थी। आप जानना चाहे तो लिस्ट हाजिर है

  • पति की लंबी आयु
  • तीन बेटे
  • अच्छी आमदनी
  • सूदखोर महाजन की याददाश्त चली जाये
  • सास की कर्कश बोलती बँद हो जाये

इन तीनो की शिवशँकर सेवा हलाँकि अब भी बदस्तूर जारी है और आज की तारीख में भी इस विशलिस्ट में कुछ खास बदलाव नही आया है। मेरे ख्याल से गोविंदाचार्य और के सी सुदर्शन यह सूची देख कर खुश हो सकते हैं कि कम से कम सेटेलाईट अपसंस्कृति ने भारतीय ग्रामीण समाज को ज्यादा चौपट नही किया है।

  • पति की लंबी आयु
  • नौ पोते
  • अच्छी आमदनी
  • सूदखोर महाजन की याददाश्त चली जाये
  • तीनो बहुओं की कर्कश बोलती बँद हो जाये
  • सचिन की पैतीसवीं सेंचुरी जल्दी पूरी हो जाये
  • राहुल गाँधी की किसी हिंदी फिल्म की हिरोइन से शादी हो जाये
  • मेवालाल गुप्ता की लुटिया थाली डूब जाये
  • विशंभर यादव का तबादला हो जाये

आगे का वृतांत अगले भाग में। तब तक के लिए लेते हैं एक छोटा सा नान-कामर्शियल ब्रे..........क|

5 comments:

Roast said...

ab hindi main comment kaise karoon

अनूप शुक्ला said...

अच्छा देखना है ब्रेक के बाद क्या होता है?

Jitendra Chaudhary said...

एक आध और विशलिस्ट ले लो

सीरियल वाली तुलसी विरानी की समस्यायें हल हो जायें
जी टीवी वालो का कम से कम एक सीरियल हिट हो जाये
इन्डियन आइडोल वाले सावन्त हमारे गाँव मे गाने आये
और हाँ लालू को एक बारगी फिर जेल हो जाये, इस बार बीस साल के लिये, बिना जमानत

आलोक said...

ab hindi main comment kaise karoon

Why can't I see the Hindi section?

Atul Arora said...

जीतू
मैं अपनी विशलिस्ट पहले ही छाप चुका हूँ, इस साल तक उसमें कोई खास बदलाव नही आया है। वैसे मैं पहले भी कह चुका हूँ कि इस वृताँत मे दैवीय तत्व मौजूद हैं अतः कमला, विमला और अमला की विशलिस्ट में घपला करना मुश्किल है।