10 May 2005

बाँके बिहारी Go Cart पर!














वृंदावन वाले बाँके बिहारी के जन्मदिन पर मिलता है सुस्वादु प्रसाद और पंचाअमृत, जब्कि हमारे बाँके बिहारी मनाते है अपना जन्मदिन अमेरिकी स्टाईल में। इस बार बाँके बिहारी और उनके भक्तो (मेरे मित्रो) की इच्छा थी कि कुछ हटके किया जाये। वैसे बात वाजिब भी है, पेंसिलवेनिया में अक्टूबर से मार्च तक ६ माह तो ठंड ही घर के अँदर दुबका रहने को मजबूर कर देती है। बचे ६ माह में कुल जमा २४-२५ सप्ताहाँत होते है जिसमे से कम से कम दो चार वर्षा में ही धुल जाते हैं। ऐसे में बचे खुचे बीसेक सप्ताहाँत में अगर कोई बर्थडे या शादी की वर्षगाँठ सरीखे आयोजन करे तो मेरे सरीखे घुमँतु के लिए यह किसी सजा से कम नही। मेरा एक आबजर्वेशन है, ऐसे समारोहो में जनता ईंडियन स्टैडंर्ड टाईम को फालो करती है यानि की नियत समय से एक दो घंटे देर से आना। फिर बातचीत के विषय भी टाईप्ड होते हैं। जरा मुलाहिजा फरमाईये

  • और भाई क्या चल रहा है?
  • यार आज तो बारिश होने वाली थी?
  • तुम्हारा प्रोजेक्ट कब तक चलेगा?
  • लेबर (हरे पत्ते वाला, नौ महीने के बाद वाला नही) कहाँ तक पहुँचा?
  • यार मेरे लायर ने कहा है कि अब एकसाथ I140 और I485 फाईल नही हो सकते।
  • भाईसाहब कौन सी वैन ठीक रहेगी?
  • और आपने घर फाईनल कर लिया?
  • आजकल मार्टगेज बहुत सस्ता है।
  • और घास काटी कि नही इस हफ्ते? (यह मजाक नही, अमेरिकी गृहस्वामित्व के साथ मिलने वाला अनचाहा झमेला है)
  • मुझे अपने बेसमेंट मे फिनिशिंग करनी है।
  • यार मार्केट (शेयर) तो बिल्कुल बैठ गया है, कन्ज्यूमर रिपोर्ट तो ठीक ठाक थी>

सवालो से अँदाजा लग सकता है कि कौन अमेरिका मे कितना जम चुका है और किस दौर से गुजर रहा है? शायद इसीलिए मुझे सब के सब एचओवी लेन में दौड़ते लगते हैं, सबकी जिंदगी एक ही रास्ते पर दौड़ रही है बस सब अलग अलग लेन में हैं। एन्ट्री लेन वाला अभी एच १ ट्रांसफर को लेकर हैरान है। वह लेन चेंज कर चुका व्यक्ति अब I140 के चक्कर में फँस चुका है। उससे बगल की लेन वाला अब घर ढूड़ रहा है या अपने घर की घास काटने को लेकर हैरान है। उससे ऊपर की लेन वाला नासाडेक की डुबकी पर ग्रीनस्पान को कोस रहा है। जब्कि एचओवी लेन में वेटेरन है यानि जो सारे घाटो का पानी पी चुका है और अपने शागिर्दो को गुरुमंत्र दे रहा है।

तो जनाब हमने सोचा कि हम परउपदेश बहुकूल तेरे वाली स्थिति नही आने देते और इस बार सबको बाँके बिहारी जन्मदिवस पर सबको Go cart से परिचय कराते हैं। प्रयोग सफल रहा, बाँके बिहारी भी खुश, मित्र भी खुश। न किसी ने किसी से घर की घास की चिंता व्यक्त करी न किसी ने किसी को शेयर के भाव बताये। और तो और मातृ दिवस पर माताऐ भी पीछे नही रही और उन्होने भी और उन्होने जेसीपेनी और मेसीज की सेल की चिंता छोड़कर Go cart का आनंद लिया।

2 comments:

अनूप शुक्ला said...

जन्मदिन जब भी रहा हो उसकी बधाई.

An Ideal Boy said...

Itni acchi hindi padh ke dil khush ho gaya. Aaj din accha gujarega.
Aapko janmdin pe badahiyan.