04 August 2005

शहर की पहचान

मान लीजिए कि किसी दिन आपको अत्यधिक रोमांच की सूझे और आप हवा के गुब्बारे में सैर के लिए या फिर पैराशूट जंप के लिए निकल पड़े। अचानक तेज हवा चलने से आप अपनी मँजिल की जगह किसी दूसरे शहर में कूद पड़ते हैं। अब आपको कैसे पता चलेगा कि आप किस शहर में हैं? जाहिर है आप यही जवाब देंगे न कि किसी से पूछ लेंगे, या फिर साईनबोर्ड पड़ेंगे। मान लीजिए वहाँ के साईनबोर्ड में शहर का नाम ही न लिखा हो या फिर लोग कोई दूसरी बोली बोलते हों तब? चलिए आपको एक आसान सा तरीका बताते हैं। अपना गुब्बारा या पैराशूट लपेट कर रख दीजिए और चल पड़िए उस शहर में चहलकदमी करने। ढूढिए कोई ऐसा नजारा जहाँ दो लोग लड़ रहे हों। इसमें चकित होने की कोई जरूरत नही, आपकी बदनसीबी ही होगी अगर आप नवाबों के शहर लखनऊ में टपक पड़े हों जहाँ कोई लड़ता नहीं वरना पूरे हिंदुस्तान में ऐसा कोई शहर नही जहाँ आपको कम से कम दो झगलाड़ू न मिल जायें। बस शहर की पहचान आसान है। अब आप यह देखिए कि अगर:

  • दो लोग लड़ रहे हैं। तीसरा आकर उस झगड़े में शामिल हो जाता है। फिर चौथा भी आकर बहस करता है कि कौन सही है। तो समझ जाईये बाबू मोशाय कि आप निश्चित ही कलकत्ता में हैं।
  • दो लोग लड़ रहे हैं। तीसरा आकर उन्हे देखता है और चला जाता है। तो समझ जाईये कि यह है मुँबई मेरी जान।
  • दो लोग लड़ रहे हैं। तीसरा आकर बीचबचाव करने की कोशिश करता है। दोनो अपना झगड़ा छोड़कर तीसरे को पीटने लगते हैं। तो समझ जाईये कि यह है बेदिल दिल्ली।
  • दो लोग लड़ रहे हैं। भीड़ तमाशा देखने जुट जाती है। तीसरा आकर चुपचाप चाय की दुकान खोल लेता है। केमछो, आप अहमदाबाद में मजा मा हैं।
  • दो लोग लड़ रहे हैं।तीसरा आकर कंप्यूटर प्रोग्राम लिखता है ताकि झगड़ा रूक जाये। पर प्रोग्राम मे बग होने की वजह से झगड़ा नही रूकता। तो फिकर नक्को करो, जनाब आप हैदराबाद में हैं।
  • दो लोग लड़ रहे हैं। भीड़ तमाशा देखने जुट जाती है। तीसरा आकर कहता है "अम्मा को यह मूर्खता नही सुहाती।" शांति हो जाती है। यह चेन्नई है।
  • दो लोग लड़ रहे हैं। तीसरा आकर बीयर की पेटी खोलता है। सब साथ मिलबैठकर बीयर पीते है। एक दूसरे को गरियाते है, और दोस्त बनकर घर जाते हैं। यह है गोवा।
  • दो लोग लड़ रहे हैं। झगड़े के बीच समय निकालकर दोनो मोबाईल से अपने दोस्तो को एसएमएस करते हैं। अब पचास लोग लड़ रहे हैं। पाप्पे तुसी लुधियाना विच टपक पड़े हो।
  • दो लोग लड़ रहे हैं। तीसरा आकर बीचबचाव करने की कोशिश करता है। उसके पान की पीक पहले वाले के कुर्ते पर गिर जाती है। भीड़ तमाशा देखने जुट जाती है। बातचीत में पता चलता है, कि तीसरा और दूसरा एक धर्म के हैं और पहला उन दोनो के हिसाब से काफिर या अधर्मी हैं। भीड़ भी झगड़े में शामिल हो जाती है। सांप्रदायिक दँगा हो जाता है। कर्फ्यू लग जाता है। गुरू, तुमको टपकने के लिए कानपुर ही मिला था?
  • दो लोग लड़ रहे हैं। आपको अचरज होता है कि पूरे बाजार में कोई उनकी ओर ध्यान नही दे रहा है। आप बीचबचाव की कोशिश करते हैं तो आपको जवाब मिलता है "क्या के रे हो मियाँ, हम तो इनसे यूँ ही दर्जी की दुकान का पता पूछ रिये थे, मियाँ इस शहर का नाम भोपाल, ये भई ऐसे ई नी हैं"।
  • दो लोग लड़ रहे है, लेकिन गाली गलौच के बीच बीच मे "पहले आप" "पहले आप" कर रहें है, तीसरा बन्दा बीच मे आकर दोनो को पान की गिलौरिया थमाता है, और तीनो झगड़ा खत्म करके, टुन्डे नवाब के कबाब खाने चले जाते है। तो यकीं मानिये जनाब आप शाने अवध लखनऊ मे है।
  • दो लोग झगड़ रहे है, खूब गाली गलौच होता है, कट्टे वगैरहा निकल आते है, इस बीच तीसरा बन्दा आता है और दोनो से बीच सड़क पर लड़ने का रंगदारी टैक्स वसूलता है. तो हमरा कहा मनिये ना, आप बिहार मे ही है भई। हम तो पहले ही कह रहा हूँ, कौनो सुने तब ना।
  • दो लोग लड़ रहे हैं। दोनो घर जाकर इंटरनेट पर बैठ जाते हैं। एक मैसेजबोर्ड पर बड़ी सी पोस्ट लिख मारते हैं। फिर टिप्पणियों में एक दूसरे को गरियाते हैं। बीसियों हजारो लोग उस पर कमेंट करते चले जाते हैं। आप यहाँ , यहाँ या यहाँ हो सकते हैं।

लखनऊ और बिहार की पहचान जीतू के सौजन्य से!

7 comments:

Naren said...

Atul ji aapke likhne ki shaili mujhe bahut achhi lagi. Mai bhi kai dino se hindi mne likhne ki koshish kar rah hno parntu, samajh mne hi nahi aata khna se shuruwat karen. Thoda marg darshan keejiyega.

मनोज अग्रवाल said...

वास्तव मे, आपको best hindi blogger award यू ही नही मिल गया

अनूप शुक्ला said...

खजूर दिख नहीं रहा है।क्या वह भी नीला हो गया।पैरासूट खुला देख के प्रसादजी याद आ गये-नील परिधान बीच सुकुमार
खुल रहा मृदुल अधखुला अंग।
और भइया मनोज,परेशान न हो। ईनाम वगैरह छंटे
लोगोंको ही मिलते हैं। इनको भी इसीलिये मिला। आगे भी कुछ न कुछ मिलेगा।

Atul Arora said...

अनूप जी
मनोज हमारे एचबिटीआई के ही उत्पाद है , आजकल माईक्रोसाफ्ट की शोभा बड़ा रहे हैं। ईनके और अनुराग जैन की बदीलत हमारे ब्लाग को चर्चा मिली है। अनुराग जैन का ब्लाग तो काफी दिनो से चल रहा है और मशहूर है, पर मनोज ने अभी तक काफी उकसाने पर भी चिठ्ठाकारी शुरू नही की है।

Laxmi N. Gupta said...

अतुल जी,

आपका रोजनामचा रमण जी की सलाह पर पढ़ना शुरू किया। 'शहर की पहचान' पढ़ कर मज़ा आगया। मैं भी कानपुर से हूँ, आपसे एक पीढ़ी पहले का। मैं ने अपना चिट्ठा नया नया शुरू किया हैः

www.kavyakala.blogspot.com

लक्ष्मीनारायण गुप्त

रेलगाड़ी said...

बहुत बढ़िया रूपांतर किया है भाई!!

Jitendra Chaudhary said...

ये भी जोड़ लो भई,
दो लोग लड़ रहे है, लेकिन गाली गलौच के बीच बीच मे "पहले आप" "पहले आप" कर रहें है, तीसरा बन्दा बीच मे आकर दोनो को पान की गिलौरिया थमाता है, और तीनो झगड़ा खत्म करके, टुन्डे नवाब के कबाब खाने चले जाते है. तो यकीं मानिये जनाब आप शाने अवध लखनऊ मे है.

दो लोग झगड़ रहे है, खूब गाली गलौच होता है, कट्टे वगैरहा निकल आते है, इस बीच तीसरा बन्दा आता है और दोनो से बीच सड़क पर लड़ने का रंगदारी टैक्स वसूलता है. तो हमरा कहना मानिये ना, आप बिहार मे ही है भई.हम तो पहले ही कह रहा हूँ, कौनो सुने तब ना