08 August 2005

पंजाबी पुत्तर !

पंकज भाई की याददाश्त दा जवाब नही। यह लेख मैने तब लिखा था जब रोजनामचा शुरू भी नही किया था और लाईफ ईन ए को पुस्तक का कलेवर देने का ख्याल भी नही आया था। बाद में इसे रोजनामचा पर डालना भूल गया शायद। द्विवेदी जी ने पंकज से पूछा है कि


बढ़िया तो लिखते ही हो...मेर मतबल ये कि...अगर नरूला...अरोड़ा इतनी बढ़्या हिन्दी लिखेंगे तो तिवारी शुक्ला द्विवेदी वगैरह का क्या होगा!!

पंकज भाई का जवाब हाजिर है

नरुला जी तो खालिस पंजाबी हैं पर अरोड़ा जी नाम से पंजाबी लगते हैं व पंजाबी कहे जाने पर बुरा भी नहीं मानते। उन्होंने इस बात पर एक प्रविष्टि भी लिखी थी जो कि पता नहीं कहाँ खो गई। उन्हें भी कॉपी कर रहाँ हूँ शायद वही उस प्रविष्टि का पता बता दें।

इसलिए पंकज भाई की फरमाईश पर यह पुराना आलेख यहाँ हाजिर है। ताकि आगे से हिंदी-पंजाबी मुद्दे पर इसका उल्लेख किया जा सके।

माननीय पंकज जी ने अपने हाँ भाई पर मुझे पंजाबी पुत्तर के संबोधन से नवाजा तो यह लेख लिखने की प्रेरणा मिली| अरोरा नाम से पंजाबी या सिख होने का आभास होता है| वैसे मुझे इस संबोधन पर कोई आपत्ति नही है, पर मेरी बेगम को अपने यूपी वाले खत्री होने पर दीवानगी की हद तक गर्व है | उसे पंजाबी समझने की गलती करने वाले को वह यह समझाये बिना नही छोड़ती कि पंजाबी खत्री एवं यूपी खत्री दोनों अलग-अलग प्रजातियाँ है| यह बात मेरे गैर उत्तर भारतीय मित्रों को उदरस्थ नहीं होती कि आखिर हम अरोरा होने के बावजूद न पंजाबी बोलते है न ही चिकन खाते हैं| मेरा ऐसी हर विकट स्थिती पर एक ही जवाब होता है कि भाई हमारे पूर्वज संभवतः पंजाब से आये थे , हमारा कुटुंब शायद कुछ पहले आ गया होगा और स्थानीय भाषा व खानपान को आत्मसात कर लिया , जो बाद में आने वालों ने अपेक्षाकृत कम किया| वैसे जाति से चिपकना सिर्फ हम भारतीयों का ही शगल नही है , अमेरिकी भी फैमिली ट्री की जड़े खोदते रहते हैं| इस काम के लिए सौ डालर तक के साफ्टवेयर तक मिलते हैं |

1 comment:

Naren said...

I will daily once come to this page, I like the way you write. But since long you dint write in life in a hov lave.

Hope to hear something on that.