23 August 2005

बड़े अखबारो को बुद्धु कैसे बनाऐं?


अरे दीवानो, मुझे पहचानो!
कहाँ से आया, मै हूँ कौन?
सीखिए इस नौजवान से। इन जनाब की राष्ट्रीयता जनाब जर्मन है। लंदन में सैर सपाटा करते वक्त शायद इनका पासपोर्ट खो गया। अब मुफ्त में वापस कैसे जायें? तो इन जनाब ने अपने कोट और बनियानों के सारे लेबल काट डाले, और लगे समुद्र तट पर चहलकदमी करने। पुलिस ने इन्हें पकड़ लिया तो इन्होनें कुछ ऐसे हाव भाव बनाये कि जैसे यह कोई सिरफिरे हैं और बोलना नही जानते। इनको मानसिक चिकित्सालय पहुँचाया गया। वहाँ भी इन्होनें अपने मुँह में दही जमाये रखा। किसी डाक्टर ने इनकी पहचान जानने के लिए इनको एक कागज दिया कि इसमें अपने देश का झँडा ही बना दो। इनके दिमाग में सबसे पहली जो चीज उसको इन्होनें कागज पर उकेर दिया। जाना चाहेंगे वह क्या था? एक पियानो। बस आनन फानन में इनके लिए कहीं से पियानो का जुगाड़ किया गया। यह जनाब उसकी एक ही कुँजी पीटते रहे और लोगो ने समझा यह कोई बड़े पियानोवादक है जिनका फिलहाल दिमाग सटक गया है। बस अखबारों में होड़ लग गयी। बीबीसी तक ने रिपोर्ट छाप दी कि इनकी संगीत पर गहरी पकड़ है और अस्तपताल का स्टाफ घँटो इनका संगीत सुन कर बेसुध हो जाता है। बस एक हेल्पलाईन सेटअप हो गयी इनकी पहचान जानने के लिए। इनकी तसवीरें टीवी पर दिखायी गयी ताकि इनका कोई मुरीद ही इन्हें पहचान ले। भाँडा तब फूटा जब किसी ने इनको चेक संगीतज्ञ थामस स्ट्रैंड समझ लिया। असली थामस स्ट्रैंड को चेक टीवी पर आकर खँडन करना पड़ा कि वे लंदन में नहीं पाये गये थे। जहाँ एक ओर लंदन के प्रतिष्ठित अखबार इनके अस्तपताल में संगीत प्रर्दशन के काल्पनिक दृश्य बुन रहे थे वहीं अस्तपताल वाले इनके एककुँजीवादन सुन सुन कर पक गये थे और अपना सिर धुन रहे थे। एक दिन किसी नर्स से यह जनाब खुद बोल पड़े और पता चला कि यह जर्मन हैं। इन्होने कभी मानसिक रोगियों के संस्थान में काम किया था और उन्ही के हावभावों को हूबहू कापी करके यह अस्पताल के डाक्टरों और नर्सों को उल्लू बनाते रहे और चार महीने तक आराम फरमाते रहें। अब अस्पताल और अखबारों ने व्यक्तिगत सूचना की सुरक्षा के कानूनो का हवाला देकर (झेंप मिटाने का इससे बेहतर तरीका और क्या हो सकता है?
) ज्यादा खुलासा करने से इंकार कर दिया है। वैसे इन जनाब को ससम्मान जर्मनी भेज दिया गया है।

2 comments:

Tarun said...

in janaab ko bahut pehle TV per dekha tha inhi khabron ke saath.....news channels ne musician ka jama pehna ke pase kiya tha.....aaj asliyat bhi pata chalgayi....apni kirkari na ho isliye phir news walo ne asliyat nahi batayi.

Ravi Kamdar said...

atlast he was able to reach Germany. well for free or did he pay for it? great story of smart man..