31 August 2005

सड़क पर शुतुरमुर्ग नाचा किसने देखा?

यह दृश्य हैं स्वर्णद्वार सेतु का। अगर आपको यह नाम कुछ अजीब सा लग रहा है तो मिर्ची सेठ शायद आपकी कुछ मदद कर सकें। खैर स्वर्णद्वार सेतु पर एक वैन में एक साहब दो शुतुरमुर्ग ले जा रहे थे। यहाँ लगे हाथ यह बता देना जरूरी है कि भले ही खुद अमेरिकी कुछ साल पहले तक भारत को मदारियों और सपेरो का देश समझते रहे हो (कालसेंटरों,आईटी विशेषज्ञों ने अब इनकी समझदानी का आकार थोड़ा बढा कर दिया है) पर यहाँ ऐसे खब्तियों की कमी नही जो अपने फार्म हाउस पर शेर चीते या फिर शुतुरमुर्ग सरीखे जीव पालते हैं। अगर आपको यकीन नही तो पहले बगल का चित्र देखिये। जब इन शुतुरमुर्ग साहब के मालिक ने वैन की ब्रेक लगायी तो झटका लगने से वैन की खिड़की खुल गयी और इन शुतुरमुर्ग साहब का मूड स्वर्णद्वार सेतु के नजारे देखने का हो गया। अब एक बार यह जनाब बाहर निकल के टहलकदमी करने लगे तो इन्हें पकड़ कर अँदर करने मे पुलिस के पसीने छूट गये।

अब सुनिए चीते की कहानी जो किसी के फार्म हाउस में नही बल्कि न्यूयार्क की एक बहुमँजिली इमारत में पाया गया। इनको पालने का शौक चर्राया था एंटोनी येट्स को। वह उसे काफी पहले लाया था जब यह चीता एक शावक था। आठ माह में चीता जवान होकर चारसौ पौंड का हो गया। येट्स के नीचे की मँजिल में रहने वाली पड़ोसन ने चीते की गुर्राहट और असह्य दुर्गधँ की शिकायत की। पर व्यक्तिगत गोपनीयता कानून की मजबूरियों के चलते बिल्डिंग प्रशासन खास कुछ पता नही लगा सका। एक दिन चीतेश्री का दिल येट्स की बिल्ली खाने को हो गया। येट्स साहब ने जब बिल्ली और चीते के बीच दीवार बनने की कोशिश कि तो चीतेश्री ने उन्हें घायल कर दिया। अस्तपताल में येट्स खुद को कुत्ते से कटा बताकर भर्ती हो गये। हलाँकि डाक्टरों को उनकी कहानी पर यकीन नही हुआ और उन्होनें पुलिस को इत्तला कर दी। पुलिस येट्स के अपार्टमेंट गयी और दरवाजे में झिरी से चार सौ पाउँड भारी चीतेश्री को चहलकदमी करते देख उनके होश उड़ गये। फिर पूरी कमाँडो कार्रवाई की गई, छत के रास्ते खिड़की के सामने लटक कर एक पुलिस अफसर ने नशे का इंजेक्शन विशेष बँदूक से दागा। चीतेश्री के बेहोश हो जाने के बाद उन्हें ससम्मान जँगल ले जाकर छोड़ दिया गया। पुलिस को अपार्टमेंट मे एक चीते का दोस्त एक तीन फुटा अजगर भी मिला था।
अब अगर आपको कोई भारत को मदारियों और सपेरो का देश कहता मिले तो उसे या तो यह लेख पढा दीजिए या फिर यह वाला।

2 comments:

अनूप शुक्ला said...

क्या-क्या देखरहे हो आजकल बालक!.कभी उछलता
हुआ लड़का,कभी नाचता हुआ शुतुरमुर्ग.फोटो बढ़िया है.लिखाई के बारे में हमकुछ नहीं बतायेंगे.

अनुनाद सिंह said...

मजेदार खबर है । पढकर अच्छा लगा ।
अनुनाद