20 December 2005

अवकाश

प्रिय पाठकों व साथियों
कुछ अति महत्वपूर्ण योजनाओं को पूर्ण करने हेतु लेखन से अवकाश लेने का निर्णय लिया है। फुरसत मिलने पर रोजनामचा फिर हाजिर होगा। तब तक के लिये विदा। अब तक मेरे लेखन को प्रोत्साहन देने के लिये आप सबका मैं तहेदिल से शुक्रगुजार हूँ।

सादर
अतुल

8 comments:

रेलगाड़ी said...

अरे भैया ऐसी भी कौनसी योजना है तो आपको लेखन से वंचित कर रही है? हम तो अगले धांसू लेख के इंतज़ार में हैं।

Sunil Deepak said...

अतुल जी, भगवान आप की सभी छोटी बड़ी योजनाओं को सफलता दे. सुनील

Raviratlami said...

यह तो बड़े दुःख की बात है. बहरहाल, उम्मीद है कि आपका यह अवकाश क्षणिक हो.

आपकी परियोजनाओं की सफलता के लिए शुभकामनाएँ.

साप्ताहिक/पाक्षिक तो लिख ही सकते हैं?

आशीष said...

अरे अतुल भैया, ये क्या गजब ढा रहे हो ? ऐसा जुल्म तो ना करो ! हफ्ते पखवाडे मे लिख दिया किजीए.

आशीष

Jitendra Chaudhary said...

ये क्या कह रहे हो मियां?
अपनी योजनाओं पर काम करते रहो, किसने रोका है, लेकिन लेखन पर रोक लगाकर तो बहुत जुलम कर रहे हो बरखुरदार। सुबह शाम, रात दोपहर, कुछ समय तो निकाल ही लेना लिखने के लिये। रोजाना ना नही, हफ़्तेवार ही सही।

आपकी योजनाओं के लिये बहुत बहुत शुभकामनायें।

Paavans said...

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आशीष said...

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आशीष

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