21 April 2005

जुड़वाँ होने का (ना)जायज फायदा!

आजकल की भागदौड़ की जिंदगी में क्या आपका दिल नहीं करता कि काश या तो दिन ३६ घंटे का हो जाये या फिर आपका कोई क्लोन पैदा हो जाये| वैसे इस तरह का प्रयोग करने से पहल जनाब डग कीनी का क्या हुआ यह जरूर जान लीजिएगा| लेकिन सैन एंटोनियो के मेयर पद के प्रत्याशी श्रीमान जूलियन कैस्ट्रो ने तो कमाल ही कर दिया| उनके चुनाव संचालको ने शायद उनकी एक मुलाकात उसी समय तय कर दी जिस समय उन्हें एक चुनावी रैली में भाग लेने था| पर आड़े वक्त पर अगर भाई वह भी जुड़वाँ न काम आयेंगे तो क्या पड़ोसी काम आयेंगे? जूलियन साहब के जुड़वाँ भाई जोक्विन कैस्ट्रो रैली में लोगो का अभिवादन और फूलमालाऐं स्वीकर करते रहे जब्कि उसी समय जूलियन साहब अपनी मीटिंग निपटाते रहे| एक अन्य प्रत्याशी फिल हार्डबर्गर ने फरमाया कि लड़कपन में किसी माशुका के पास अपना जुड़वाँ भाई भेज देना लड़कपन का मजाक हो सकता है पर लाखो लोगो के सामने इस तरह अपनी जगह अपने जुड़वाँ भाई को भेजना धूर्तता है| अब विरोधी उम्मीदवारों को बुरा लगे तो लगता रहे पर यह दोनो भाई तो गा रहे हैं कि

जलने वाले तो जलते रहेंगे|
हाथो को अपने मलते रहेंगे|
मिल के करेगे हम धमाल|

13 April 2005

क्या आप इस धर्माधँ को थप्पड़ मारके जगा सकते हैं ?

इस व्यक्ति का मानना है कि यह बिहार के लाखो लोगों का सच्चा प्रतिनिधि है|



तमाशे में हम किसी से कम नहीं
वैसे इनकी पार्टी को तमाम वोट भी मिले हैं और सीटे भी| पर यहाँ उठाया गया मुद्दा भिन्न है| अगर कोई एक नेता हिंदुवादी होने का दंभ भरकर ताजमहल पर कब्जे की बात करे या फिर गुजरात में क्रिया प्रतिक्रिया का नया नियम प्रतिपादित करे तो दस नेता , एक हजार अखबार और कम से कम दस हजार ब्लाग उस की धज्जियाँ उड़ाने में पीछे नहीं रहेंगे| अगर पड़ताल करें तो हिंदु धर्म के उन तथाकथित ठेकेदारों की मिट्टी पलीद करने वाले ज्यादातर सज्जन स्वंय हिंदु होते हैं| यह दर्शाता है कि एक विभाजन और सैकड़ो दंगो के बाद भी हमारा धर्मनिरपेक्ष चरित्र अभी क्षतविक्षत नही हुआ और हम किसी भी धर्म के ठेकेदार को बता सकते हैं कि त्रिशूल चमकाने से कोई सच्चा हिंदू नहीं बन जाता | पर इसका उल्टा मुझे क्यो नहीं दिखता | जरा रामविलास पासवान जद (यू) से गठजोड़ हेतु रखी गई शर्तों पर नजर डालिए|

  • पहली शर्त है नीतिश और शरद भाजपा जैसी सांप्रदायिक पार्टी का साथ छोड़े|
  • दूसरी शर्त है बिहार का अगला मुख्यमंत्री मुस्लिम हो|

भाजपा सांप्रदायिक है या नहीं यह विवाद का विषय हो सकता है| भाजपा को सांप्रदायिक मानने वाले ऐसा इसलिए मानते हैं कि वह हिंदुओ की हितैषी है| पर किसी राज्य का प्रतिनिधि होने की शर्त उसका सुयोग्य,ईमानदार,कुशल प्रशासक होने की जगह धर्म विशेष (चाहे वह कोई भी धर्म का हो) होने का माँग करने से रामविलास जी क्या खुद सांप्रदायिक नहीं हैं? मुझे ताज्जुब सिर्फ यह है कि इस पर दस नेता नहीं बोले, न ही बोले एक हजार अखबार| बोली तो सिर्फ एक वेब साईट| मुझे नहीं पता कि मेरा ब्लाग, मेरा कोई मुस्लिम भाई पड़ता है कि नहीं| पर अगर पड़ता है तो यह टिप्पणी जरूर करे कि अगर नरेंद्र मोदी सांप्रदायिक हैं तो रामविलास को आप क्या दर्जा देंगे? क्या उसने कभी मुस्लिम समाज के उत्थान के लिए स्कूल कालेज खुलवाने की, गरीब मुस्लिम छात्रो को छात्रवृति देने की (आरक्षण की भीख नहीं), गरीब मुस्लिमों के मुफ्त ईलाज की पहल की है| अगर आप कम्युनिस्ट कांग्रेसी या गैर सांप्रदायिक विचारधारा से प्रेरित हैं या फिर मुस्लिम हैं तो बतायें कि रामविलास की इस तरह की माँग को सांप्रदायक क्यो ना माना जाये| अगर नहीं तो कृपया मेरी आँखे खोलिए कि मुझे रामविलास क्यो मुस्लिमो को उल्लू बनाते नजर आ रहे हैं और कोई भी मुस्लिम या धर्मनिरपेक्षी उन्हें वैसे ही जवाब नही दे रहा जैसे नरेंद्र मोदियों ,प्रवीण तोगड़िया और बाल ठाकरे को दिया जाता है|
वैसे मैं यह भी जोड़ना चाहूँगा कि यह वही रामविलास है जिसने पाकिस्तान में मुशर्रफ मियाँ को खुद का परिचय सबसे ज्यादा मतों से जीतने वाले पर गुजरात के दंगो के विरोध में मंत्रीपद को लात मारने वाले शख्स की हैसियत से दिया था| वह बात अलग है कि उनको खुद मुशर्रफ मियाँ ने घास नही डाली| गुजरात हमारा अँदरूनी मामला है|मैं मानता हूँ कि हमारे मुस्लिम भाईयो को देशप्रेमी होने के लिए ठाकरे या मोदी के सर्टिफिकेट की कतई जरूरत नही| तो फिर रामविलास को धर्मनिरपेक्ष होने के लिए गैर मुल्क के तानाशाह से सर्टिफिकेट लेने की क्या जरूरत थी| अगर उन्हे कोई ऐसा सर्टिफिकेट मुशर्रफ मियाँ दे देते तो क्या हिंदुस्तानी मुस्लिम भाई उसे मँजूर कर लेते? मुझे यह भी मालुम है कि इरफान पठान ईंजमाम उल हक की गिल्लियाँ बिखेरते यह नहीं सोचते कि वे खुद या ईंजमाम मुस्लिम हैं, न ही किसी मुस्लिम हिंदुस्तानी फौजी के हाथ काँपते हैं जब दुश्मन के रूप में पाकिस्तानी फौजी सामने होता है| तो फिर पराये मुल्क के तानाशाह के सामने अपने घर के झगड़े का खुलासा करना कहाँ की समझदारी है? अपने फायदे के लिए अपने ही मुल्क की दो कौमों के बीच जहर बोने वाले ऐसे शख्स को अगर मुस्लिम ही जवाब दें तो मजा आ जाये|

07 April 2005

तांत्रिको ओझाओं के लिए आऊटसोर्सिंग की संभावनाऐं जगीं

जापान की इस कंपनी ने भूत प्रेतो की उपस्थिती दर्शाने का राडार ईजाद किया है| यह कंप्यूटर की USB Drive में लग जाता है| इसमें लगा LED संकेतक पराशाक्तियों की उपस्थिति में जल उठता है| इस राडार में लगी जैव घड़ी और असामान्य ऊर्जा स्तर की उपस्थिति नापने वाला संकेतक बता सकता है कि


  • भूत या प्रेत कितनी दूर है?
  • क्या भूत या प्रेत चल रहा है?
  • उसका मानवो पर कोई असर हो सकता है?

अब लाख टके का सवाल है कि आपने अगर भूत प्रेत का पता लगा भी लिया तो उनसे निपटेगा कौन| यहीं पर मात खा गये जापानी| अजी भारत के तांत्रिक और ओझा किस दिन काम आयेंगे? हमें फौरन चार छह वेब साईट बना डालनी चाहिए जैसे कि www.internationalghotsbuster.com वगैरह| काल सेंटर भी बनाये जा सकते हैं| वीडियो कांफ्रेसिंग की सुविधा के साथ, ताकि हमारे तांत्रिक स्क्रीन पर देख सके कि भूत कितना प्रचंड या उज्जड् है और उसके हिसाब से उसका ईलाज कर सकें|अब अगर यह खबर सही है तो हमें जल्द ही रेलवे स्टेशनों की दीवारों पर ऐसे विज्ञापन देखने को मिलेंगे
अँतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बाबा अघोरानंद
जापानी तकनीकि और भारतीय पद्धति के अनूठे समायोजन से द्वारा भूत दिखाने और भगाने की अचूक व्यवस्था|यादि आप विदेश में रहते हैं और किसी व्याधि से पीड़ित हैं तो तुरंत 1-800-bhoot-bhagao मिलाईये या फिर getridofgost@aghoranand.com पर ईमेल करिए. हम रिमोट पद्धति से अदृश्य बाधा का उपचार करेंगे|
कृप्या नोट करें

  • अग्रिम भुगतान के बाद ही उपचार होगा|
  • भुगतान सिर्फ वीसा या मास्टर क्रेडिट कार्ड से|
  • एक भूत भगाने की फीस १०० डालर|
  • भूतो के झुंड के लिए कोई डिसकाउँट नहीं|
  • भूत अगर पड़ोसी के घर घुस जाये तो हमारे संस्थान की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी|
  • भूत से संवाद में अनुवादकों की फीस अलग से लगेगी|
  • हमारे संस्थान से सिर्फ प्रेतबाधाओ से मुक्ति के लिए संपर्क करें
  • पति या प्रेमि प्रेमिका के वशीकरण, दुश्मनों को सबक सिखाने या किसी अन्य उद्देश्य के लिए तंत्र मंत्र की क्रिया के लिए परेशान न करें|

06 April 2005

मुशर्रफ मियाँ के खिलाफ भारतीय ब्लागजगत की मुहिम


कारगिल प्रकरण के जन्मदाता मुशर्रफ मियाँ भारत तशरीफ ला रहे हैं| अभी कुछ दिन पहले उनकी माँ और बेटो का अच्छा खासा इस्तकबाल हुआ था, अलीगढ और लखनऊ में| अब दो खेमों ने तलवारे तान ली है|
अमन के पुजारियों का मानना है:


  • हमें शांति व्यवस्था की बहाली के काम करना चाहिए|
  • भारत पाकिस्तान द्वारा आर्थिक सहयोग बढाने से पारस्परिक वैमनस्यता कम होगी|
  • हर साल बाघा पर मोमबत्ती लेकर जाने वाले कुलदीप नैयर तो दो कदम आगे बढकर पाकिस्तानियों को चीन से सीख लेने को कह रहे हैं| जिस तरह चीनियों ने व्यापार की खातिर अरूणांचल को ढंडे बस्ते में डाल दिया है वैसे ही पाकिस्तानी भी काश्मीर मे कुछ समय के लिए बर्फ क्यो नहीं जमी रहने देते?
  • सबसे दमदार तर्क तो यह है कि बंदरो (पाकिस्तान भारत) की लड़ाई से बिलौटे (लाकहीड-मार्टिन) को फायदा हो रहा है|

अब जरा उनकी बात सुने जिनकी भृकुटी तनी हैं:

  • मुशर्रफ मियाँ ने ही कारगिल प्रकरण के द्वारा लाहौर घोषणा को पलीता लगाया था|
  • हमारे नेताओं द्वारा कारगिल के खलनायक के स्वागत में पलक पांवड़े बिछाने से, कारगिल में मारे गये शहीदो के परिवारो के दिल पर क्या गुजरेगी?
  • मुशर्रफ मियाँ ने तो अभी भी काश्मीर और कारगिल का आलाप नही छोड़ा है| यहाँ तक कि उनका खुद का जाल स्थल भारत को पाकिस्तान का मुख्य शत्रु मानता है|
  • सीमापर आतंकवाद अब भी जारी है|
  • व्यापारिक संबधो के पैरवीकार बताये कि पाकिस्तान हमें वरीयता प्राप्त राष्ट्र का दर्जा देने में आनाकानी क्यों कर रहा है?

इस मुद्दे पर ब्लागजगत में भी स्पंदन हो रहा है| जिस तरह से कुछ अंग्रेजी ब्लागर लामबंद हो रहे हैं , लगता है कि राजनैतिक खेमेबंदी ब्लागजगत में भी पैठ बना चुकी है||