फिलाडेल्फिया के सिटी हाल मे शोले का सजीव प्रदर्शन!

कल फिलाडेल्फिया के सिटी हाल पर एक वीरू चढ गया और सारा गाँव इकठ्ठा हो गया। बिल्कुल शोले की तरह। फर्क सिर्फ इतना था कि गाँव वालो की जगह दमकल,पुलिस, डाक्टर,नागरिक और नगर पालिका के तमाशबीन थे, मौसी की भूमिका थी एफबीआई की,वीरू थे एक नगर पार्षद श्री रिक मैरियानो और जय की भूमिका मे थे मेयर जान स्ट्रीट। यहाँ के नेताओ ने वाकई शोले की स्टोरी से प्रेरणा लेकर तमाशा खड़ा किया था। ट्विस्ट सिर्फ इतना था कि श्रीयुत मैरियानो जो एक बिजली कारीगर की हैसियत से नगर पार्षद तक का सफर तय कर चुके हैं अपने ऊपर एफबीआई द्वारा भ्रष्टाचार, कदाचार, अनाचार,व्यभिचार और न जाने कौन कौन से आचार जैसे असंख्य आरोपो की जाँच से त्रस्त होकर सिटी हाल के टावर पर चढ गये। जिस टावर से वह कूदने की धमकी देते रहे वहाँ ऐसा सुरक्षा घेरा बना है कि मैरियानो के फरिश्ते भी नही कूद सकते। कूद भी जाते तो दस पँद्रह फुट नीचे प्लेटफार्म पर गिरकर ज्यादा से ज्यादा हाथपैर कि हड्डी तुड़ा बैठते। पर जब दमकल वालो ने उन्हे जबरन नीचे उतारने के लिए सीढीयाँ लगाई तो जय भैया, यानि कि मेयर जान स्ट्रीट जिनकी गरदन पर खुद एफबीआई वालो का शिकँजा है, नमूदार हुए। जाने क्या उन्होनें वीरू को समझाया कि वीरू भाई नीचे आ गये। हाल-फिलहाल अपने वीरू भाई फिलाडेल्फिया के मानसिक चिकित्सालय मे अवसाद का ईलाज करा रहे हैं। जिस तरह से बालीवुड वाले हालीवुड से प्रेरणा लेते रहते हैं, उसी तरह से फिलाडेल्फिया के नेताओं ने हमारे बालीवुड की फिल्म शोले से स्टंट की प्रेरणा ले डाली है। अगर यह प्रेरणाचक्र आगे घूम कर कहीं भारत पहुँच गया तब तो हर शाख (इमारत) पे उल्लू (नेता) बैठ जायेगा। क्योकिं अपने यहाँ सारे नेता तो रिक मैरियानो के भी उस्ताद है। ऐसे में ऊँची अट्टालिकाओ की कमी पड़ सकती है और नेताओ में जाँच से बचने के लिए ऐसी ईमारतों पर चढने के लिए मारामारी भी हो सकती है। भारत सरकार को अब शाँति भँग होने से बचाने के लिए सभी ऊँची इमारतों की छते सील कर देनी चाहिए।

