24 April 2006

अरे भाई हम कब से इस्लाम के दुश्मन हो गये?

चिठ्ठाकारी से अवकाश लेने का कारण एक नये व्यवसायिक अँतर्जाल का निर्माण था। यह अभी भी निर्माणप्रक्रिया में है। आज सवेरे पता चला कि इसे किसी ने हैक कर दिया। मैने अभी व्यवसायिक कारणवश साईट का नाम चित्र में ढक दिया है, पर डोमेन नेम अमेरिकी होने से इस्लाम के अँधानुयाईयो के चपेटे में आ गया लगता है। हद है, इस तरह जबरन दूसरे के घर में कब्जा करके अपना झँडा लहराने से लोग इस्लाम से प्रेम करेंगे या फिर इस्लामियों को दाद खाद खुजली के रोगियों की तरह अपने से दूर रखने की यथासँभव कोशिश करेंगे। मन तो कर रहा है कि खूब लानत मलानत की जाये पर दुबारा कोई केसरिया या हरा झँडा लहराने साईट पर न आये इसका जुगाड़ करना जरूरी है, इसलिये लाहौल भेजने का काम मिर्जा साहब एँड कँपनी के भरोसे छोड़ता हूँ।

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