24 April 2006

क्योंकि भैंस को दर्द नही होता! [भाग ५]

शिवशँकर जी से ब्लागमहिमा सुनने के बाद अमला,कमला और विमला और भी ज्यादा कनफ्युजिया गयी थी। मसले के हल निकल रही था। उधर कैलाश पर्वत पर अफरातफरी मची हुई थी। शँकर जी की हाटलाईन सिठमरा गाँव के मँदिर से जुड़ी होने के कारण बड़ी गड़बड़ हो गयी थी। बड़े बड़े नेताओ, अभिनेताओं और अधिकारियों की प्रार्थनाऐं प्रतीक्षासूची में फँसी पड़ी थीं। शिव जी की औघड़ सेना ने भी कम खुराफते नहीं ढायी थीं। औघड़ सेना के खुराफाती तत्व किसी तरह से सँसार के कँट्रोल पैनल से छेड़छाड़ कर बैठे थे। जिसकी वजह से दलेर मेंहदी जैसे अँदर हो गये जब्कि लालू सरीखे बाहर घूमते रहे। काँटा लगा सरीखे एलबम हिट हुए वहीं बीजेपी सरीखे पिट गये। और तो और अडवाणी की पाकिस्तान यात्रा ने ऊपर भी भूचाल ला दिया था। उधर ब्रह्मा जी अलग परेशान थे, एक तो विष्णु जी की ऐजुकेशन लीव खत्म होने का नाम नही ले रही थी तिसपर शँकर जी के यहाँ का सँचार केंद्र बीएसएनएल से होड़ लेता दिख रहा था। हद तो तब हो गई जब हजरत मोहम्मद के डिपार्टमेंट ने सीधे ब्रह्मा जी पर ही सांप्रदायिकता का आरोप मढ़ दिया। ब्रह्मा जी सन्न रह गये। सब सोच रहे थे कि हो न हो यह सब यानि कि उसी मुच्छाड़ियल जिया उल हक की कारीगरी है, क्योंकि कायदेआजम तो महीनों से आडवाणी का दिया गैरसांप्रदायिकता का सर्टिफिकेट लहरा लहरा नेहरू को चिढा रहे थे। और तो और, कायदेआजम तो अगले जन्म में रामविलास पासवान के परिवार में जन्म लेने की ब्रह्मा जी से जिद पकड़ के बैठ गये थे क्योकि उन्हें अब भारत की राजनीति में जबरदस्त स्कोप नजर आ रहा था।
हजरत मोहम्मद की चिल्लपों के सामने ब्रह्मा जी को बेबस देखकर नारद जी को आना पड़ा।
अब सुनिए नारद मोहम्मद संवाद
नारद: जनाब हजरत साहब, आपके दरबार में हाजिरी लगाने भर से लोगो को हाजी होने का तमगा मिल जाता है। जहाँ एक हाजी अँगूठाटेक होकर भी विधायक बन जाता है वही जन्म भर पुराणों से माथापच्ची करने वाला शँकराचार्य तक को जेल में ठूँस दिया जाता है, फिर आप कैसे सांप्रदायिकता का आरोप लगा रहे है।
हजरतः नारद मुनि साहब, आप हरदिल अजीज हैं, पर जो हो रहा है वह हमें हमारे नुमाईंदो पर सरासर ज्यादती लग रही है।
नारद: आप कैसी बात करते हैं, आपको ऐसा क्यों लगता है कि इस सर्वसत्ता से सांप्रदायिकता जैसा तुच्छ कार्य हो सकता है। अल्लाह ईश्वर एक हैं यह आपसे ज्यादा कौन जाना है?
हजरतः नारद देखिये मुनिश्वर , इस ट्रेड सीक्रेट का सरेआम खुलासा मत कीजिए नही तो गजब हो जायेगा वरना नीचे न जाने कितनो की धार्मिक भावनाओं को ठेस लग जायेगी और न जाने कितनो की मजहबी दुकान बँद हो जायेगी।। पिछले कुछ दिन से हम देख रहे हैं कि हमारे नुमाईंदो पर आपके डिस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट वाले शँकर जी की हमारे नुमाईंदो पर नजर कुछ ज्यादा टेढ़ी है। पहले ही बुश नाम की आफत कम थी जो तुर्की, ईरान और अब पाकिस्तान में भूकँप ला दिया। हमें लगता है कि यह हमारे नुमाइंदो को कम करने की साजिश हो रही है।
नारद: जनाब हजरत साहब, यह सरासर गलत है, शँकर जी का डिस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट बिना भेदभाव के काम करता है, अगर ईरान , तुर्की में भूकँप आये तो अमेरिका पर भी कैटरीना का नजला गिरा। हिंदुस्तान और श्रीलँका भी सुनामी की चोट खाये बैठे हैं। आप कैसे कह सकते हैं कि डिस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट में धार्मिक आधार पर कोई भेदभाव हो रहा है?
हजरतः चलिऐ डिस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट न सही ब्रह्मा जी के कांसट्रक्शन डिपार्टमेंट का क्या कहेंगे? हमें लगता है यहाँ पर जरूर हमारे साथ ज्यादती हो रही है।
नारद: हजरत साहब आप अब बात बदल रहे हैं। यह आप कैसे कह सकते हैं?
हजरतः देखिये, अफगानिस्तान को आपने सिर्फ पत्थर दे दिये। फिलीस्तीन के बगल में ईजराइल नाम का जिन्न ईजाद कर दिया। हमारे बँदे जाये तो जाये कहाँ?
नारद: पर सारे के सारे तेल के भँडार किसको बख्शे गये हैं? देखिये कांसट्रक्शन डिपार्टमेंट बहुत ही बैलेंस्ड डिपार्टमेंट है। यहाँ सँतुलन के लिये हर अच्छी चीज के साथ एक नुक्स जरूर जोड़ दिया जाता है जिससे किसी के साथ नाइंसाफी न हो। अगर अरब देशो के पास तेल हैं तो तेल की धार पीने को शेख भी दे दिये। अगर अमेरिका को सुपरपावर बनाया तो हरीकेन जैसी आफतें और लालबुझक्कड़ जनता दे दी, चीन को विशाल सँसाधन दिये तो चीनीयों को आबादी बढ़ाने की जबरदस्त उर्वर क्षमता दे दी। है कि नही परफेक्ट बैलेंस?
हजरतः नही, कतई नही, वह जमीन का टुकड़ा जो तीन और पानी से और एक ओर हिमालय से घिरा है, जिसकी जमीन सोना उगलती है और आबादी आईटी के ईंजिनियर उगलती है। वह तो महाशक्ति बनने के कगार पर दिखता है। उस हिंदुस्तान को आपने हर तसल्लीबख्श चीज अता कर रखी है। उस पर यह रहनुमाई क्यों?
नारद: जनाब हजरत साहब, हिंदुस्तान को बरक्कत बख्शते वक्त बैलेंस कही नही बिगड़ा है, उसे पाकिस्तान और बांग्लादेश सरीखे पड़ोसी और अम्मा, बहनजी और लालू सरीखे नेता देकर हमने नकेल भी लगा रखी है।
हजरत साहब निरूत्तर हो गये। हलाँकि एक शिकायत उन्हें तब भी थी। वह यह कि ईराक में डिस्ट्रक्शन स्विच आन करके शँकर जी उसे आफ करना भूल कर कहाँ गायब हो गये?
तँग आकर ब्रह्मा जी ने हजरत साहब को तमाम मनुहार कर वापस भेजा और नारद जी को पृथ्वी पर जाकर शँकर जी का पता लगाने का आदेश थमाया। अब नारद जी जब तक सर्च वारँट को तामील करें तब तक के लिए लेते हैं एक छोटा सा नान-कामर्शियल ब्रे..........क।
भाग १|भाग २|भाग ३|भाग ४

5 comments:

अनूप शुक्ला said...

दुबारा पढ़ना सुखद अहसास की तरह रहा । अगर इतने दिन की अनुपस्थित रही तो लेख की पठनीयता ने मामला 'बैलेंसिया' दिया।

Deepak/दीपक said...

धाँसू लिखा है। मजा आ गया।

Narad Muni said...

आओ पहलवान, बहुत दिनो बाद आए।अच्छा लिखे हो, नारद जी अभी भी सर्च वारन्ट लेकर घूम रहे है, तुम्हारे नाम का। अकेले मे मिलो, तो सारी चार्जशीट थमाई जाए।

अब लेखनी रुकनी नही चाहिए, नही तो थाने मे बिठाकर लिखवाएंगे, समझ लेना।

ई-स्वामी said...

भईये रोजनाम़चा नाम दिये हो ब्लाग को - नाम की लाज रख लिया करो - रोज ना सही अल्टरनेट दिन ही सही, ऐसे ही शानदार लिखा करो! :)

Udan Tashtari said...

अच्छा लिखें हैं. इतनी प्रतिभा के साथ ऎसी क्या अडचन है कि आप नियमित नहीं लिख रहे हैं.

समीर लाल