05 May 2006

क्योंकि भैंस को दर्द नही होता! [भाग 6]

नारद जी हमेशा की तरह हाथ में वीणा लेकर नारायण नारायण गाते वसुँधरा की ओर प्रस्थान करने लगे। आकाश मार्ग से पृथ्वी अतिसुँदर दिख रही थी। हलाँकि अब नारद जी को भी धरती वालों की तरह कम्यूटमेनिया होने लगा था। पहले तो धरती की परिधि के बाहर हर साल मच्छरों की तरह उपग्रह बढ़ रहे थे , फिर उसके बाद वायुयानो का आवागमन। नारद जी ने एक नजर स्पेस स्टेशन को देखा फिर धरती के वातावरण में प्रवेश कर गये। अभी मुश्किल से कुछ हजार फुट ही उतरे होंगे कि कुवैती एयरलाईन का वायुयान बगल से निकलते दिखा। विमान पर बने चाँद सितारे से नारद जी को स्वर्ग में हजरत साहब की बेकरारी याद आयी और वे शीघ्रता से आगे जाने को उद्यत हुये कि जो उन्होनें सुना उस पर यकीन नही हुआ। आवाज आ रही थी "अरे नारद फिर बैठ गया क्या? लगता है इसकी फीड काम नही कर रही।" नारद जी ने कुछ ही दिन पहले इस फीड वगैरह के चोंचलो की ट्यूशन विष्णु जी को दी थी पर यहाँ खुले आकाश में कौन उनकी तथाकथित फीड का तहलाकाई भँडाफोड़ करने पर ऊतारू था। अचानक फिर आवाज आई , "अरे नारद मुनि हमारे फोरम की फीड भी जोड़ लीजिए न।" नारद जी चौंके यह कौन है उनसे अजीबोगरीब याचनाऐं कर रहा था। नारद जी अपनी वीणा पर लगे एँटिना को ठीक करने लगे कि आवाज आयी " देखो भईया फोरम वोरम की फीड मैं नही जोड़ सकता, नही तो बकिया लोग भी चिल्लायेंगे । अब एक अकेले नारद का का दिखावें, भँडौ़वा भी, पेल भी पहेली भी, कुँडली भी और फोटू भी? " नारद जी को तो वह हालत कि काटो तो खून नही। साफ साफ आईडेंटिटी क्रिसिस का मामला हो गया।

नारद जी ने एक पल तो सोचा कि वापस फूट लें ब्रह्मा जी के पास यह फरियाद लेकर कि धरती के पापों का घड़ा भर गया है। लोग अब सीधे सीधे भगवानों के काम की जबरिया आऊटसोर्सिंग पर ऊतारू है। पर फिर यह सोच रूक गये कि कलयुग को समाप्त रकने के लिये भी शिवशँकर जी की जरूरत पड़ेगी। लिहाजा उन्हें खतरा उठा कर भी यह पता लगाना जरूरी था कि खुद उनकी पहचान कौन चुराने का दुस्साहस किसने किया था। नारद जी को ज्यादा ढूढ़ना नही पड़ा। आवाज सामने से गुजर रहे वायुयान से आ रही थी। नारद जी ने फौरन उस वायुयान में प्रवेश किया। वहाँ उनकी नजर एक्जीक्यूटिव क्लास में एक गोरे ,गोल ,सुदर्शन चेहरे वाले व्यक्ति जिसकी मूँछे किसी खूबसूरत काली हवाई पट्टी या किसी पिच पर ढंके मखमली तिरपाल जैसी लग रही थी और जिसे बाकी लोग कभी जीतू तो कभी नारद मुनि कहकर बुला रहे थे , उस पर पड़ी। अब असली नारद जी ने अपने प्यारे नारद से क्या सवाल जवाब किये यह जानने के पहले लेते हैं एक छोटा सा नान-कामर्शियल ब्रे..........क।

साभारः धरती के नारद की तारीफ के बोल यहाँ से टीपे गये हैं

भाग १|भाग २|भाग ३|भाग ४ | भाग ५

3 comments:

Udan Tashtari said...

बहुत खुब.अब नारद की नारद से वार्तालाप तो देखने लायक होगा..इन्तजार लगा है, जल्द पधारें.

--समीर लाल

Pratik said...

असली नारद जी को बहुत ही टेंशन हुई होगी, जब उन्होंने जीतू भाई को देखा होगा। उनसे लड़ा भी नहीं जा सकता, जीतू भाई ज़रा हृष्ट-पुष्ट हैं (हमें तो कम-से-कम फ़ोटू देख कर ऐसा ही जान पड़ता है) और बेचारे नारद जी उनके सामने थोड़े कमज़ोर से हैं (पुरानी धार्मिक फिल्मों में पतले-दुबले जीवन नारद का किरदार करते थे, सो असली के बारे में भी हमारा यही तुक्का है)।

अनूप शुक्ला said...

शुरुआत बढ़िया है। हम भी शुरू हुये तुम्हे पैडल मारते देखकर।