12 May 2006

मिलिये जयँती लाल और सुच्चा सिंह से!

लीजिये वायदे के मुताबिक सुच्चा सिंह और जयँती लाल
की तस्वीरें हाजिर हैं। वैसे इन दोनो के नाम कुछ और हैं पर मैने इन्हे ये नाम प्यार से दिये हैं। क्या हैं कि देशी घर के इन सदस्यों के नाम भला विदेशी क्यों हों। वरना इनकी पहचान का सँकट खड़ा हो सकता है। अब तो मजा यह है कि इनके पालनकर्ता श्री बर्वे साहब भी इन्हें सुच्चा सिंह और जयँती लाल के नाम से ही बुलाते हैं। इन नामों की पृष्ठभूमि में है एक फिल्म अवारा पागल दीवाना । जो देयर इस सम्थिंग अबाऊट मैरी की टोपोलाजी है। इस फिल्म में एक किरदार जयँतीलाल नाम का श्वान है जिससे मुझे काले वाले बिलौटे का नाम जयँतीलाल रखने की सूझी। यह काला बिलौटा बहुत डरपोक है , अक्सर मेरी आवाज सुनते ही छुप जाता है। जब्कि भूरा बिलौटा निडर है अतः उसका नाम सुच्चा सिंह रख छोड़ा है। सु्च्चा सिंह की वीरता का एक और किस्सा भी है। कुछ साल पहले बर्वे साहब के घर एक कुत्ता लाया गया जो कि शीपडाग था। शीपडाग को चरवाहे भेड़ बकरी वगैरह इकट्ठा करने के लिये पालते हैं। यहाँ बर्वे साहब के घर में इस शीपडाग ने अपना कर्तव्य नही भूला और दिनरात सुच्चा सिंह और जयँती लाल को खदेड़ कर एक घेरे में बँद करने की फिराक में रहता। बेचारे बिलौटे मारे डर के पूरे सप्ताह बेसमेंट में नजरबँद रहे। एक दिन सुच्चा सिंह ने ठान लिया कि जीना है तो सिर उठाकर। वह बेसमेंट से बाहर आया, शीपडाग उस तक दौड़ कर आया ही था कि सुच्चा सिंह ने दिया अपने दाँये हाथ का पँजा घुमा कर उसकी नाक पर। बेचारा शीपडाग चारो खाने चित्त। उस दिन से दोनो पक्षों में अघोषित युद्धविराम है। इस श्रँखला की अँतिम कड़ी में आप देखियेगा सु्च्चा सिंह एँड जयँती लाल चेक्स ईन ए होटल!

1 comment:

अनूप शुक्ला said...

यह जानकारी सुकूनदेह है कि दुनिया में कोई जीव है जो तुमसे डरता है।