06 June 2006

सुन साहिबा सुन , मेरे फोन में कितने गुन !

अब तो शस्य श्यामला भारत भूमि के वाशिंदे अब गोस्वामी जी के जीजाश्री सरीखे अनजान नही रहे फोन के अत्याधुनिक फीचर्स के मामले में। फिर भी मैने देखा है कि अमेरिकी फोन इस मामले में अभी कोसो आगे है। क्या क्या झन्नाटेदार फीचर मौजूद होते हैं। आप भी मुलाहिजा फरमाईयेः


  1. कालर आईडीः जो कॉल रिसीव करने वाले को बताता है आपकी पहचान। पहली बार अमेरिका में हमने किसी को फोन लगाया। फोन लगाते ही फोन उठाने वाले ने हमें जब हमारे नाम से सँबोधित किया तो हमारे मुँह से यही निकला "प्रभू आपको यह महाभारत के सँजय की आँख कहाँ से मिल गयी?" वैसे यह अब भारत में भी प्रचलित है। काश यह तब भी होता जब हमें कालेज के दिनो में न जाने कौन गुमनाम षोडशी फोन पर परेशान करती थी। हम न उसका नँबर जानते थे न आवाज पहचान पाते थे, इसलिये न थप्पड़ लगा सकते थे न ... ।
  2. काल वेटिंगः भई बड़े काम की चीज है उन आत्माओं के लिये जो दो बातूनियों के फोन पर डटे होने की स्थिति में इंगेज लाईन पर कम से कम अपने अस्तित्व का सबूत तो दे सकती हैं।
  3. काल फारवर्डिंगः मेरे जैसे सप्तहाँत पर हमेशा घर से नदारद रहने वाले जीवों के लिये अति उपयोगी। वैसे मैने इसका दुरुपयोग भी होते देखा है। हमारे मित्र त्रिपाठी जी, आजकल पत्नी की भारत यात्रा का सदुपयोग जम कर गुलछर्रे उड़ाने में कर रहे हैं। मिसेज त्रिपाठी के एयरपोर्ट पर दिये गये हुक्म की सरासर नाफरमानी करके त्रिपाठी जी हर रविवार बजाये योगा करने के डोगा क्लास में ऐश करने पहुँच जाते हैं। घर पर मिसेज त्रिपाठी की फोन कॉल आते ही स्वतः उनके मोबाईल पर पहुँच जाती है जहाँ वे अपने घर पर ही मौजूद होने के फर्जी सबूत किस तरह से देते हैं उसकी कल्पना ही की जा सकती है।
  4. डू नाट डिस्टर्ब: सनातनी आलसियों के लिये। चाहे कितने सवेरे कोई फोन लगाये, आपकी सुखदः नींद को आपका वफादार फोन टुनटुनाकर टूटने नही देगा, सीधे ही वॉयस मेल पर पहुँच जायेगा। अपने स्वामी जी ने भी पिछले हफ्ते हमारे बाँके बिहारी का शिकार बनने के बाद इसका कवच ओढ़ लिया है। दरअसल, पिछले रविवार को सीन यह हुआ कि हम तो एक शापिंग माल के बाहर अपनी कार में बाँके बिहारी के साथ अपनी बेगम के इंतजार में बैठे बोर हो रहे थे , चुनाँचे को स्वामी जी को गपशप के लिये फोन लगा बैठे। स्वामी जी बेचारे थोड़ी देर तो भलमनसाहत में गपियाये, फिर फरमाये कि "अभी अभी सो के उठा हूँ। चड्डी में हूँ, तैयार होकर बात करता हूँ। " हम कुछ बोले उससे पहले बाँके जो वार्तालाप हमारे सेलफोन के स्पीकर पर सुन रहे थे, उवाचे "अँकल, हम तो थामस की डिजाइन की चड्डी पहनते हैं , आप कौन डिजाईन की पहनते हो।" इस डायलाग पर स्वामी जी के मुखमँडल पर आयी आभा की कल्पना ही की जा सकती है।
  5. थ्री वे कालिंगः नाम से जाहिर है कि बतरस या वाकयुद्ध दोनो ही स्थिति में, तीन समझदारों को उलझाने की सुविधा का नाम है। इसका एक बड़ा संगीन उपयोग सुझाता हूँ। मान लीजिये आपको पाँडे जी से कोई हिसाब बराबर करना है और आप जानते हैं कि पाँडे जी पीठ पीछे परनिंदा कला के उपासक है। बस पहले आप वर्मा जी को फोन लगाईये, उन्हें मुँह में दही जमाकर वार्तालाप सुनने के लिये ऐश्वर्या राय की कसम दे दीजिये। अब थ्रीवे कॉलिंग का (स)दुरूपयोग करते हुये पाँडे जी को फोन लगाईये और बातों बातों में वर्मा जी का जिक्र छेड़ दीजिये। बाकी का काम पाँडे जी सँभाल लेंगे।


अब यह तो थे वह फीचर्स जो हम सब देखते जानते हैं। पर कभी कभी सोचता हूं कुछ और वाँछित फोन फीचर्स जो अब तक फोन कँपनियों को पता नही क्यों नही सूझे? जरा आप भी मुलाहिजा फर्माईये।

  1. कॉल झटकाः यह फीचर आपको फोन पर बोर करने वाली शख्सियतों के और टेलीमार्केटिंग कँपनियों के लिये समान रुप से उपयोगी है। जैसे ही आप इस तरह की कॉल से चट जायें, फोन पर कोई गुप्त कोड डॉयल करते ही, काल करने वाले के रिसीवर पर हल्का सा विद्युत आवेश प्रवाहित हो जाये। उसे इस हल्के से झटके से सदबुद्धि आ जाये कि हर कर्म का फल अवश्य मिलता है।
  2. कॉल फटकाः यह भी ऊपरोक्त दो तरह के प्राणियों के खिलाफ आजमायी जा सकती है। ऐसी किसी भी विकट कॉल के दौरान एक गुप्त कोड डॉयल करने पर आपके अँतर्राज्यीय या अँतर्रदेशीय कॉल्स का बीस प्रतिशत बिल की देनदारी आपके खाते से निकल कर काल करने वाले के खाते में स्वतः स्थानांतरित हो जाये। इसे कहते हैं जोर का झटका धीरे से लगे।
  3. कॉल मस्काः अगर आपकी बीबी आपको दिन में अक्सर फोन करके घँटो उलझाये रखती है तो, ऐसी किसी भी अनचाही कॉल के दौरान फोन पर कोई गुप्त कोड डॉयल करते ही आपकी आवाज में प्रिरिकार्डेड वाक्याँश जैसे कि "हाँ, हूँ, ठीक कहा, हूँ अच्छा.. " वगैरह वगैरह थोड़ी थोड़ी देर पर बजते रहें। फोन करने वाला(ली) भी खुश और आप को भी संत्रास से मुक्ति।
  4. बेकरार कॉलः कभी कॉल वेटिंग में त्रिशँकु की स्थिति को प्राप्त हुये हैं। खासकर कि अपने मोबाइल के कीमती एयरटाईम को किसी व्यक्ति या कंपनी द्वारा कॉल वेटिंग की रस्सी पर सूखते देखकर किसका दिल में टीस नही उठेगी। ऐसी स्थिति में फोन पर कोई गुप्त कोड डॉयल करते ही आपको कॉल वेटिंग की मझधार में छोड़ने वाले व्यक्ति के फोन पर या उसके फोन स्पीकर पर जोर से यह सँदेश बजेगा " जागो मोहन प्यारे!" या फिर "इँतहा हो गई , इँतजार की .. "
  5. कॉंल ००७: अगर आप किसी कँपनी में बॉस या मैनेजर है, और आपको शक है कि लोग आपकी खड़ूसियत की पीठ पीछे बुराई करते हैं या फिर आपकी मातहत सेक्रेटरी अपनी सहेली से आपके कत्थे से रँगे कत्थई दाँतो के बारे में बतियाती है तो यह फीचर आपके लिये वरदान है। पूरी कँपनी के फोन नेटवर्क पर आपका नाम किसी भी वार्तालाप में आते ही समूचा वार्तालाप गु्प्त रूप से न सिर्फ रिकार्ड हो जायेगा बल्कि आपके वॉयस मेलबाक्स में पहुँच जायेगा।
  6. चकाचक हाईवे कॉलः फर्ज कीजिये आप कार से कहीं जा रहे हैं और आपके आगे कोई कार कच्छप गति से चलने पर अमादा है। ऐसे से अपने मूड का सत्यानाश करने की जरूरत नही न ही हार्न बजाकर आगे वाले पर गुस्सा उतारिये। हो सकता है आगे नाना पाटेकर चल रहे हों या फिर राजा भैया के बाराती । बस अपने सेलफोन पर गुप्त कोड डॉयल करिये, यह फीचर आपके सेल फोन से १०० मीटर की दूरी में मौजूद हर सेलफोन में रिकार्डेड मैसेज बजा देगा कि "भईये तुरँत गड्डी किनारे लगाके मैकेनिक बुला , तेरी तेल की टँकी चू रही है.." , मैसेज बजते ही देखिये आगे चलती कार कैसे आपके लिये दन्न से रास्ता खाली करती है।
  7. एसएमएस पलटवारः कोई आपको बकवास एसएमएस भेज भेज कर दुखीः किये हो, तो यह फीचर बहुत उपयोगी है। आपके सेलफोन में एक एसएमएस ब्लैकलिस्ट मौजूद हो। किसी भी ब्लैकलिस्टेड नँबर से एसएमएस आते ही उसे एक स्पेशल एसएमएस वापस चला जाये। यह मैसेज खोलते ही प्राप्तकर्ता की बैटरी तुरँत डिस्चार्ज हो जायेगी।


अपनी टिप्पणियों के द्वारा बताना मत भूलियेगा अगर कोई फीचर छूट गया हो। वैसे आपका क्या ख्याल है , इन सातो फीचर्स का पेटेंट करा लेना चाहिये?

4 comments:

Jitendra Chaudhary said...

झकास है गुरु।
सबसे झकास तो हाइवे वाली कॉल। बहुत कोफ़्त होती है जब आगे वाला, रो रो कर चलाता है, और अगल बगल से निकलने का रास्ता भी नही होता। हम तो ऐसे समय अपनी गालियों का भन्डार का द्वार खोल देते है।रास्ता मिले ना मिले, भड़ास निकल जाती है।

स्वामी जी की चड्डी वाला राज का पता चले तो एक पोस्ट लिख देना।

अनूप शुक्ला said...

लेख तो जब चौधरी जीतेंदर परसाद बढ़िया बता चुके हैं तो हम कैसे कहें कुछ और सिवाय समर्थन करने के! बकिया अमेरिकी कम्पनियां जो फीचर देती हैं उसमें लोक चेतना की समझ नहीं शामिल करतीं। बास की बुराई करने का सबसे प्रचलित तरीका है बास को कोई निक नेम देकर उसके बारे में बतियाना। जितने मिशनरी निंदक होते हैं वे उतने ही
दिमागी रूप से उर्वर होते हैं। हर बुराई सत्र के लिये नया नाम रखते हैं। हाँ यह बताया जाय कि वो वाला फीचर कौन सा होता है जिसमें अमेरिका में किसी के फोन से कोई दूसरा फोन करता है तथा काल भारत 'दैट इज इंडिया' आ जाती है।और जिसके फोन का प्रयोग होता है वो बेचारा बाबा भारती बना घूमता रह जाता है।

आशीष said...

आने वाले कन्यायो के रांग नम्बर के लिये कुछः उपाय मेरे पास भी है :-)

धनराज वाधवानी said...

अज्ञानता की परकाष्ठा ... अनचाहा एस.एम.एस. पाकर लोग क्यों परेशान होते हैं। काश इन्हें पढ़कर लोगों को आसानी से डीलेट करना आ जाए। अधिकांश उन लोगों की परेशानी ही परेशानी है जिन्हें मिटाना नहीं आता। बताइये कोई आपके यहां आ धमके उससे पीछा छुड़ाना कठिन है या एस एम एस डीलेट करना? कोई बिना नाम लिखा पोस्ट कार्ड अधिक परेशान करता है या एस.एम.एस. ? वस्तुत: मोबाईल फ़ोन को जो लोग हॊव्वा समझते हैं उन्हीं के लिये परेशानी है। असल में उन्हें पता ही नहीं कि परेशानी सीमा पर दुश्मन की गोलियों से अधिक होती है या एस.एम.एस. या फ़ोन काल से। - धनराज वाधवानी,