06 September 2006

शराफत अली को शराफत ने मारा!

हमारे एक मित्र हैं मियाँ शराफत अली। बहुत दिन से अकुला रहे थे कि हिंदुस्तान में उनकी हुनरमंदी की बेकदरी हो रही है और इसी के चलते वहाँ कोई तरक्की नही हो रही । शराफत अली की हमने भी मदद की बहुत कोशिश की कि उन्हें भी अमेरिका में कुछ काम मिल जाये। अभी पिछले हफ्ते मामूगिरी करने वाले एक मित्र की मदद से शराफत अली का इंटरव्यू कराया गया। यहाँ यह बता देना जरूरी है कि यह मामू सुबह हो गई वाले मामू नही हैं , इन मामुओं पर आगे रोशनी डाली जायेगी। अब नौकरी के लिये जो प्रश्न पूछे जाते हैं उन सबके स्टैंडर्ड,रेडिमेड जवाब दुनिया भर के जालस्थलों मे मिल जाते हैं। पर जनाब शराफत अली की सोच अलहदा ही है, जो जवाब उन्होंने दिये, दिल की गहराई से सच्चाई से दिये। अब आप, शराफत अली के टेलिफोनिक इंटरव्यू का मुलाहिजा फरमायें।

प्रश्नकर्ताः आपने इस नौकरी के लिये आवेदन क्यों किया?
शराफत अलीः वैसे तो हमने बहुतेरी नौकरियों के लिये अप्लाई किया था, खुशकिस्मती हमारी कि कॉल आपने ही किया।

प्रश्नकर्ताः आप इस कंपनी में काम क्यों करना चाहते हैं?
शराफत अलीः अब किसी न किसी कंपनी में काम तो करना ही है, जो भी काम दे दे। कोई खास कंपनी का नाम दिमाग में रखकरके ठलुआ तो बैठै नही रहेंगे?

प्रश्नकर्ताः बताईये, आपको ही क्यों चुना जाये इस नौकरी के लिये?
शराफत अलीः आपको किसी न किसी को चुनना ही है, हमको भी आजमा के देख लीजिये।

प्रश्नकर्ताः अगर आपको नौकरी मिल जाये तो क्या करेंगे?
शराफत अलीः अब यह मूड और समय के हिसाब से तय होगा कि हम क्या करेंगे।

प्रश्नकर्ताः आपकी सबसे बड़ी ताकत क्या है?
शराफत अलीः साहब , किसी ऐसी कंपनी को ज्वाईन करना ही हमारी सबसे बड़ी हिम्मत का सबूत है जिस कंपनी की तकदीर का हमें ओर छोर न दिखता हो।

प्रश्नकर्ताः और आपकी सबसे बड़ी कमजोरी?
शराफत अलीः जी , लड़कियाँ।

प्रश्नकर्ताः आपकी सबसे गँभीर गलती क्या रही है और आपने उससे क्या सीखा?
शराफत अलीः पिछली कंपनी को ज्वाईन करना। उससे मैने यह सीखा कि ज्यादा तनख्वाह के लिये नौकरी बदलते रहना चाहिये, तभी तो मैं आपसे मुखातिब हूँ।

प्रश्नकर्ताः आपकी पिछली नौकरी में आपकी सबसे बड़ी कौन सी उपलब्धि थी जिस पर आप गर्व कर सकते हैं?
शराफत अलीः जनाब, पिछली नौकरी में मैने कोई तीर मारा ही होता तो उनसे तरक्की की माँग के वहीं न टिक गया होता, काहे को खामखाँ आपके सवालो का जवाब देकर अपना और आपका वक्त जाया कर रहा होता ?

प्रश्नकर्ताः एक चुनौतीपूर्ण स्थिति का उदाहरण देकर बताईये उससे कैसे निपटेंगे?
शराफत अलीः सबसे ज्यादा मुश्किल है इस सवाल का जवाब देना कि "आप नौकरी क्यों बदलना चाहते हैं?" और इससे निपटने को मुझे हजार तरह के झूठ बोलने पड़ते हैं।

प्रश्नकर्ताः आपने पिछली नौकरी क्यों छोड़ रहे हैं?
शराफत अलीः उसी वजह से, जिस वजह से आपने अपनी पिछली नौकरी छोड़ी होगी।

प्रश्नकर्ताः आप इस नौकरी से क्या अपेक्षा रखते हैं?
शराफत अलीः अगर ज्यादा काम न दिया जाये पर तरक्की मिलती रहे।

प्रश्नकर्ताः आपके क्या लक्ष्य हैं और उन्हें पाने को क्या तैयारी कर रहे हैं?
शराफत अलीः ज्यादा पैसा बनाना और उसके लिये हर दो साल में कंपनी बदलना।

प्रश्नकर्ताः आपको हमारी कंपनी के बारे में कैसे पता चला और आप इसके बारे में क्या जानते हैं?
शराफत अलीः मुझे पता था आप यही पूछेंगे, मैं आपकी कंपनी की बेबसाईट सत्ताईस मर्तबा देख चुका हूँ।

प्रश्नकर्ताः आप कितनी तनख्वाह की उम्मीद रखते हैं ?
शराफत अलीः जनाब बिना बढ़ोत्तरी के कौन नौकरी बदलता है? आप तो जो जमाने का दस्तूर है उसके हिसाब से मेरी हालिया तनख्वाह से २० फीसदी ज्यादा दे दीजिये मैं कल से काम पे हाजिर हो जाऊँगा।

शराफत अली इस आखिरी सवाल पर मन में सोच रहे थे कि "भैंस जब पूछ उठायेगी तो गाना नही जायेगी, गोबर ही करेगी, मुझे पता था कि तू यही सवाल करेगा इसलिये मैने अपने बायोडेटा में पिछली तनख्वाह ३० फीसदी ज्यादा बयाँ की है! "

शराफत अली को इंटरव्यू लेने वाले ने जमाने के दस्तूर के हिसाब से, नतीजा जानने को बाद में संपर्क करने को कहा। अब शराफत अली बाट जोह रहे हैं। और जगहों पर भी अप्लाई कर रहे हैं। अगर आप लोगो की कंपनी में ऐसे साफगोई से बोलने वाले बँदो की कदर हो तो जरूर बताईयेगा।

4 comments:

रत्ना said...

तभी तो आजकल शराफत का टोटा नज़र आता है। हैरान हूँ शराफत अली ने अभी तक इसका दामन क्यों नहीं छोड़ा।

Udan Tashtari said...

"प्रश्नकर्ताः आप इस नौकरी से क्या अपेक्षा रखते हैं?
शराफत अलीः अगर ज्यादा काम न दिया जाये पर तरक्की मिलती रहे।"

हा हा, ऎसी ही नौकरी तो मै भी खोज रहा हूँ. शराफत भाई को मिल जाये, तो उस मामू से हमे भी मिलवाया जाये.

बहुत सही लिखे हैं.आजकल सच का जमाना कहां रहा..इसलिये हम तो सिर्फ़ शराफत अली जी को शुभकामनाऎं दे सकते हैं.

नीरज दीवान said...

कारपोरेट सेक्टर के मुलाज़िम ऐसे ही हो गए हैं, ये बात अलग है कि मुंह पे शराफ़त अली वाला मुंहफटियापन नहीं होता. हा हा मज़ा आ गया.. भई इधर, भी ऐसिस्च माहौल है. नौकरी बदलो तो ही तनख्वाह में बढ़ोतरी होती है. वरना थोड़ी बहुत बढ़ोतरी से मान जाओ.
शराफ़त अली को प्रतीक बनाओ भई और सीरीज़ जारी रखो. शराफ़त अली के दिल में भी बहुत सी बातें होंगी कहने को.. ये आज का आम आदमी बनना चाहिए.. मुंहफटिया कहीं का.

rajeev said...

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