20 November 2006

गोविंदा, सलमू और अक्की को चुनौती देने आया मेंबले !

पिछले सप्ताहांत पर बाँके बिहारी हैप्पी फीट देखने को पसड़ गये। आमतौर पर अपनी कोशिश यह रहती है कि ऐसे मौको पर बालगोपालमँडली को उनकी माँ के कार्टून देखने छोड़कर हम ऐसी कोई फिल्म देखना पसंद करते हो जिसे देखने में घर में बाकी सबकी फूँक सरकती है यानि कि हारर या जबरदस्त एक्शन। मल्टीप्लेक्स में पिक्चर देखने के यह फायदे है। पर इस बार कोई धाँसू विकल्प न होने से हैप्पी फीट देखनी पड़ी।
पर अपनी राय यह बनी कि मौका लगे तो जरूर देखी जाये यह फिल्म। कहानी शुरू होती है इस फिल्म के नायक श्रीमान मेंबले के माता पिता मेम्फिस और नोर्मा जीन नाम के पेंग्विन्स के संगीतमय मिलन से। चौंकिये मत, गा बजाकर प्रेमियों को रिझाने की कला पर सिर्फ बॉलीवुड का पेटेंट नही है। हर पेंगविन्स के लिये दिल से गाना आना जरूरी है। अब नोर्मा जीन तो चल देती है मछली के शिकार पर और रात भर अँडा सेंकने की ड्यूटी लगती है मेम्फिस साहब की। यह भी अँटार्कटिका के पेंगविन्स की जीवनशैली का अटूट नियम है। इनके चूजे अपनी माँ को तड़ से पहचान भी लेते हैं। पर लोचा यह हो जाता है कि मेम्फिस मियाँ जो रात्रिकाल में बाकी सब पेंग्विन्स के साथ भैरवी आलाप रहे थे अँडा कुछ देर के लिये खो बैठते हैं। शायद उसका असर था या कुछ और कि उनकी संतान मेंबले नाचते हुये अँडे से बाहर आती है।
अब इस कहानी में ट्रैजेडी भी है, ड्रामा भी और इमोशन भी। बेचारा मेंबले नीली आँखो वाला खूबसूरत पेंग्विन है पर सबसे सुरीले माँ बाप की निहायत ही बेसुरी संतान। बेचारे को ग्रेजुऐशन डे पर डिग्री नही मिलती। वह बात अलग है कि वह गजब का नचैया है , यार अपने गोविंदा को भी मात करता है । मेंबले का दिल भी आना था तो सबसे सुरीली ग्लोरिया पर। मेंबले को कुछ हिप हाप गाने वाले दोस्तों की टोली मिल जाती है। हिप हाप गायक एडले एमिगो और मेंबले की ताल मचा देती है पेंगविन्स की महफिल में धमाल। पर जैसा हर हिंदी पिक्चर में होता है , समूह के मुखिया नोहा को मेंबले की टोली के यह तौर तरीके सीधे सीधे संस्कृति पर हमला लगते हैं और वह उन्हे पंचायत के साथ मिलकर समूह निकाल दे देता है।

बेचारा मेंबले वहाँ से निकलकर टकराता है एडले एमिगो के धर्मगुरू लवलेस से। अब लवलेस ऐसा इकलौता पेंग्विन है जिसने साक्षात एलियन्स यानि की दूसरी दुनिया के लोगो को देखा है। यह धर्मगुरू भी भारतीय धर्मगुरूओ की तरह बिना दक्षिणा के कुछ नही बताता। उसका ब्रह्मवाक्य है "एक पेबल दो, एक सवाल का जवाब पाओ।" पेबल संगमरमरी पत्थर को कहते हैं जिस पर बैठना लवलेस को पसंद है।

यही सारा वितंडा शुरू होता है, मेंबले को लगता है कि उसके पेंग्विन समूह की इकलौती परेशानी यानि की भोजन सामग्री में होती कमी के पीछे एलियन्स ही जिम्मेदार हैं। मेंबले पूछता है लवलेस से कि क्या एलियन्स समझाने से मान जायेंगे? लेकिन लवलेस मियाँ की एलियन्स के दिये उपहार में अटकी गर्दन से आवाज ही नही निकलती। दरअसल यह एलियन्स कोई मँगल गृह के प्राणी नही आप और हम यानि कि मानव हैं, और लवलेस के गले में अटका दुलर्भ हार वस्तुतः कोक के केन को फँसाये रखने वाला प्लास्टिकनुमा छल्ला है। अब मेंबले , लवलेस और एडले एमिगो की टीम निकल पड़ती है एलियन्स से मिलने के जीवट अभियान पर। रास्ते में कुछ सील मछलियाँ और व्हेल से हुई भिड़ंत पूरा आईमैक्स थियेटर हिला देने को काफी थी।
जुझारू मेंबले एलियन्स के पानी के जहाज के पीछे तैरता अकेला ही पहुँच जाता है न्यूयार्क सिटी। पर परिस्थितियाँ उसे एक चिड़ियाघर में पहुँचा देती है। अपने पेंगविन कुल के लिये परेशान मेंबले चिड़ियाघर आने वाले हर एलियन्स यानि की मानव से गुजारिश करता है कि हमारे भोजन को हमसे मत छीनो हम मिट जायेंगे पर उसकी भाषा कोई नही समझता। इकोसिस्टम को बिगाड़ने पर अमादा इंसान शायद ऐसी मर्मस्पर्शी तरीके से कुछ समझ सके।

यही एक छोटी लड़की को मेंबले मियाँ अपना टैप डाँस क्या दिखाते है कि पूरे न्यूयार्क में चिहाड़ मच जाती है। विज्ञानीजन मेंबले की पीठ में सेंसर बाँध कर उसे वापस अँटार्कटिका भैज देते हैं। वह अपने परिवार से मिलकर बहुत खुश होता है और सब मिलकर डाँस करते है बिल्कुल दिलीप कुमार वाले "कोई मेरे पैरो में घुँघरू बँधा दे .." जैसा। नोहा फिर खरीखोटी सुना ही रहा होता है कि एलिय्नस यानि कि मानव टपक पड़ते हैं । नोहा कोई और चारा न देख मेंबले को टैप डाँस करने को बोलता है। सारे पेंग्विन नाचते हैं और विज्ञानीजन अँदाज लगाते है कि पेंग्विन कुछ कहना चाहते हैं। बात बढ़कर यूनाईटेड नेशन पहुँची और अँटार्कटिका में मछिलयो के शिकार पर प्रतिबँध लग जाता है।
वार्नर ब्रदर्स की इस अजीमोशान पेशकश की समाप्ति के बाद देखा कि हाल में पिक्चर देखने आये दर्शक बच्चे ही नही साठ साठ साल के बूढ़े भी थे। हॉल के बाहर मजाल है कि कोई भी बच्चा बिना टैप डांस करते न निकला हो। यह सब देखकर सोच रहा था कि अब वार्नर ब्रद्रस हॉल के अलावा बच्चो के टीशर्ट , कप प्लेट , खिलौने यहाँ तक कि चढ्ढी बनियान पर मेंबले की तस्वीर छाप-छाप कर नोट बनायेगी जब्कि बॉलीवुड के निर्माता सरकार के सामने कटोरे फैलायेंगे कि सबसिडी दो अगर बच्चो की फिल्म बनवानी है तो। यार यहाँ जार्ज मिलर ने खेल खेल में सामाजिक महत्व का संदेश भी दे दिया और अपने बॉलीवुड के नकलटिप्पुओं को सत्तर के दशक की कहानियों की मय्यत निकालने से फुर्सत नही। चालीस पचास साल में कितनी बाल फिल्में बनायी हैं हमने ? सफेद हाथी, शिवा का इंसाफ,छोटा चेतन और मकड़ी। इसमें से सफेद हाथी को छोड़कर अपन को तो मनोरंजन में लपेटकर संदेश देती और कोई फिल्म नही लगती।
हैप्पी फीट के एनिमेशन गजब के हैं और व्हेल से पिंड छुड़ाते मेंबले और लवलेस के सीन में ध्वन्यात्मक प्रभाव हैरतअँगेज। धरती के इस कोने में हर क्षण अंगहिलाते रहना पेंग्विन की मजबूरी है क्योंकि ऐसा नही करने पर खून जम जाता है, पर इस गहन बात को एक सुरीली रात के दृश्य से समझाया गया है और नन्हे मुन्ने यह आसानी से समझ जाते है कि पेंग्विन्स के रात भर गा गाकर मनाने से ही अँधियारे मे छुपा सूरज निकलता है। हिपहाप गायक एडले एमिगो की अलग बस्ती और उनके नाच पर नोहा का नाक भौं सिकोड़ना सूक्षम्ता से दर्शाता है कि गोरो के दिमाग से रंगभेद अभी गया नही।

4 comments:

Udan Tashtari said...

"हिपहाप गायक एडले एमिगो की अलग बस्ती और उनके नाच पर नोहा का नाक भौं सिकोड़ना सूक्षम्ता से दर्शाता है कि गोरो के दिमाग से रंगभेद अभी गया नही।"

--बड़ी सूक्षमता से देखा गया है. :)

अनूप शुक्ला said...

बढ़िया लिखा है. हम देख रहे हैं आजकल हमारे अतुल समीक्षा और रपटें बड़ी धांसू लिखने लगने हैं.

Anonymous said...

सुंदर लेख ।

संजय बेंगाणी said...

गजब का विश्लेषण किया है भीड़ू.