22 October 2007

एक प्रिंटर की शहादत!

देखिये यह मजेदार फिल्म, जिसमे हमें भी अभिनय करना पड़ा। फिल्म साढ़े आठ मिनट की है, विषयवस्तु हैः सप्ताहांत भर मस्तीखोरी के बाद सोमवार की मुसीबतें, बॉस द्वारा अगले रविवार को काम पर हाजिर रहने का आदेशात्मक अनुरोध, महाबोर मीटिंगस, और सबसे बढ़कर एक खलनायक भी है, जो कि है प्रिंटर।


यह फिल्म आफिस स्पेस से प्रेरित है और एक वार्षिक समारोह के लिये इसका फिल्मांकन हुआ था। खास बात यह थी कि फिल्म का संपादन, निर्देशन, अभिनय वगैरह सब कुछ आफिस के सहकर्मियों द्वारा किया गया। यहाँ तक कि बॉस का अभिनय कर रहे बॉस भी असली हैं और असल जिंदगी में वैसे कड़कमिजाज नही, जैसे इस फिल्म में दिखे। फुरसतिया जी के शब्दों में पूरी मौज ली गई है सिचुऐशन की। वैसे असल आफिस स्पेस जिसने न देखी हो , जरूर देखे।

12 comments:

Udan Tashtari said...

बहुत बेहतरीन फिल्म बनाई है.

अब छोड़ो यह कम्प्यूटर वाला काम-फूल टाईम फिल्मों में ही लग लो.

गाने और पटकथा लिखने के लिये तो मैं एक ईमेल की दूरी पर बैठा ही हूँ. :)

राजीव said...

भाई अतुल, तुम्हारी यह फिल्म तो अच्छी लगी। सहकर्मियों से रू-ब-रू भी होना ठीक था, परंतु प्रिंटर की शहादत का दृश्य देखकर तो लगा इतना विध्वंसकारी और हिंसात्मक। ऐसा विचार हुआ कि एक ऐसी समिति की भी आवश्यकता है जो निर्जीव वस्तुओं पर इस प्रकार होने वाले निर्मम अत्याचार को रोकें। बाद का नोटिस भी देखा कि "No production printers were destroyed.." वगैरह, पर यह वैसा ही लगा जैसे कोई कहे कि उत्पादक पशुओं पर अत्याचार नहीँ किये जा रहे। ;)

मगर फिर सोचा कि यदि सभी निर्जीव वस्तुओं के लिये यही सहृदयता दिखायी तो रासायनिक अभिक्रियाओं का क्या करेंगे? उनमें तो सभी में क्रियाशील तत्वों के साथ ऐसा ही होता है। बड़ी समस्या में है मन...

शेष रही फिल्मांकन की बात, तो वह तो जम गया! अब आती है विश्लेषण की बारी तो तुरंत सम्पर्क किया जाय चवन्नी (अजय जी) से... वे प्रिंट मीडिया से भी जुड़े हैं।

SHASHI SINGH said...

शानदार !!!

Kiran said...

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Shrish said...

अमेरिकन एक्सैण्ट की वजह से बातचीत तो समझ नहीं आई पर अन्तिम दृश्य मजेदार लगे।

प्रिण्टर का हश्र देखकर आगे से आपके ऑफिस के दूसर प्रिण्टर खराब नहीं होंगे। :)

otogaz said...

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Büşra said...

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The medical research is used by the thousand of medical school in all worlds this school is the give best medical doctor in per year. As a result, today's early-career job seekers in academic medicine must look beyond the tenure-track label and look closely at the details: a position's specific financial guarantees, the institution's commitment to its nontenured young researchers, the value of the experience they will gain, and the contribution they will make to society. And while checking the nontenure-track box used to imply a tremendous disadvantage on grant and job applications, the gap seems to have narrowed. "What does tenure mean anymore?" Franko asks.Medical school is the best research for the new technique.