31 October 2007

किताब का मालिक कौन?

कल की बात है, घर के अध्ययन कक्ष में बाँके जी और उनकी माँ के बीच जोर आजमाइश चल रही थी, पढ़ाने लेकर। बाँके जी की माँ चिल्ला रही थीं "ये क्या उल्टा सीधा लिखा फिर से लिखो।"
बाँके जी ने कसमसा के फिर से लिखा। लिखाई ऐसी कि खुद लिखें बाँचे खुदा। क्या करे बाप पर जो गये हैं
नतीजा फिर वही, फिर से डपटे गये, और माँ अमादा है कि बाँके जी की हस्तलिपि सुधरवा के रहेंगी।
कुछ देर बाद बाँके जी के सब्र का पैमाना छलक गया। आगे जो मैने सुना वह कुछ ऐसा था इसमें बाँके जी और उनकी माँ का वार्तालाप अपनी अपनी मातृभाषा में है।

बाँके जी: Hey Mom, tell me one thing !
बाँके जी की माँ: टेलो ( कभी कभी परिहास में हम लोग अंग्रेजी का हिन्दीकरण कर डालते हैं )
बाँके जी: Whose home work is this?
बाँके जी की माँ : तुम्हारा
बाँके जी: and whose book is this?
बाँके जी की माँ: तुम्हारी
बाँके जी: and who has to write in this?
बाँके जी की माँ:तुमको
बाँके जी: then who is the Boss of this book?
बाँके जी की माँ:आप
बाँके जी: then I will decide how to write in it, because I am the Boss!


बाँके जी की माँ सन्न! हम सोच रहे हैं कि शायद इसी तरह के जवाब अमेरिकी कूटनीतिज्ञ देते होंगे दुनिया के नेताओं को।

22 October 2007

एक प्रिंटर की शहादत!

देखिये यह मजेदार फिल्म, जिसमे हमें भी अभिनय करना पड़ा। फिल्म साढ़े आठ मिनट की है, विषयवस्तु हैः सप्ताहांत भर मस्तीखोरी के बाद सोमवार की मुसीबतें, बॉस द्वारा अगले रविवार को काम पर हाजिर रहने का आदेशात्मक अनुरोध, महाबोर मीटिंगस, और सबसे बढ़कर एक खलनायक भी है, जो कि है प्रिंटर।
video

यह फिल्म आफिस स्पेस से प्रेरित है और एक वार्षिक समारोह के लिये इसका फिल्मांकन हुआ था। खास बात यह थी कि फिल्म का संपादन, निर्देशन, अभिनय वगैरह सब कुछ आफिस के सहकर्मियों द्वारा किया गया। यहाँ तक कि बॉस का अभिनय कर रहे बॉस भी असली हैं और असल जिंदगी में वैसे कड़कमिजाज नही, जैसे इस फिल्म में दिखे। फुरसतिया जी के शब्दों में पूरी मौज ली गई है सिचुऐशन की। वैसे असल आफिस स्पेस जिसने न देखी हो , जरूर देखे।